हरे पत्ते – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi

  कामिनी बेटी, जोया की दुल्हन की साड़ी ले आईं, रूक्मिणी देवी ने  कमरे के अंदर से ही आवाज लगाई। मांजी ले तो पहले ही आए थे , मैं और रोशनी पर आज तैयारी के लिए दुकान में दी थी, कामिनी ने कमरे की देहरी पर आते हुए कहा। तो अब जा कर ले आओ, रुक्मणी … Read more

हिचकियाँ.. – अंजू अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

 हिच.. हिच….  “अरे वाह! हिचकियां आ रही है, यानी कि फिर मुझे कोई याद कर रहा है!”  पढ़ते-पढ़ते नेहा ने अपनी किताब, कलम, कॉपी सब बंद करके रख दी!  “अब पढ़ाई थोड़ी देर बाद होगी! अभी तो वो इन हिचकियों का आनंद लेगी! यानी कि कुछ पल उसके साथ बिताएगी जो उसे याद कर रहा … Read more

समझदार बहू – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

नीरज.. आज शाम को ऑफिस से आते समय गुलाब जामुन लेते हुए आना, तुम्हें पता ना इस समय मुझे कभी चटपटा कभी खट्टा कभी मीठा खाने का मन करता है तो आज मेरा मीठा खाने की बहुत ही इच्छा हो रही है और हां गुलाब जामुन छुपा कर लाना मां जी को इसकी भनक ना … Read more

आत्मसम्मान का स्वाद – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

    ” नंदा..ज़रा मेरी साड़ी तो प्रेस कर दे..।” छोटी भाभी के आदेश पर नंदा उनके कमरे की तरफ़ दौड़ी तभी ,” नंदा.. ,मोनू को लंचबाॅक्स दे आ।” बड़ी भाभी की आवाज़ पर नंदा किचन की तरफ़ दौड़ी।प्रतिदिन उसके दिन की शुरुआत ऐसे ही दोनों भाभियों के आदेशों से ही होती थी।कुछ सालों पहले तक तो … Read more

आत्मसम्मान – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

“आज शाम को जरा ढंग से तैयार हो जाना बड़ी बुआ आऐंगी लड़के वालों को लेकर” मां मीना ने फरमान सुनाया! सुनकर सांवरी का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा!फिर वही नुमाईश फिर वही आवभगत,लडके की मां-बहन की एक्सरे के समान चीरती नज़रें,उनके व्यंग्य बाण”चेहरे का फेशियल वगैरह करवाया करो,उबटन लगाया करो थोड़ा-बहुत रंग निखरेगा” और … Read more

मेरा आत्मसम्मान मुझे प्यारा है। – अर्चना खंडेलवाल : Moral Stories in Hindi

मधु, कहां हो ??? मेरी शर्ट नहीं मिल रही है, कब से चिल्ला रहा हूं, तुम्हें कुछ समझ नहीं आता है क्या?? रोहित गुस्से से बड़बड़ाता हुआ, कमरे से बाहर आया और अंदर चला गया। ड्राइंग रूम में बैठे मधु के सास- ससुर चाय पी रहे थे, ससुर जी के चेहरे पर कुटिल मुस्कान छा … Read more

पुरस्कार – सुनीता परसाई ‘चारु’ : Moral Stories in Hindi

सुगना अपनी  नातिन का हाथ थामे उसे शहर के जूडो-कराटे स्कूल लेकर जा रही थी।वह हमेंशा हाथ में डंडा रखकर चलती थी।गाँव में उसे सब ‘डंडे वाली अम्मा’ कह कर बुलाते थे। रास्ते में सब्जी की दुकान देखकर सुगना को याद आया, कैसे उस दिन वह डण्डा लेकर दौड़ी थी। एक दिन एक ग्राहक उसकी … Read more

पाप का घड़ा – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

रघु एक छोटी फर्म में लेखाकार  का काम करता था। वह बहुत ही मन लगाकर ईमानदारी से अपने काम को अंजम देता था। काम चोरी, हेराफेरी से उसे सख्त नफरत थी । फर्म मालिक सेठ गोवर्धनदास जी उसके काम  से बहुत प्रसन्न थे। वह स्वाभिमानी एवं मेहनती लड़का था। उसे किसी की टोका टाकी अपने … Read more

बदलता जमाना – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  माँ जी, हिचक छोड़ मुझे नौकरी करने की इजाजत दे दे।अब पहले वाला जमाना नही रहा है, माँ जी अब लड़कियां भी हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है।और अपने परिवार में सहयोग कर रही हैं।         वो सब मैं भी जानती हूं पर बेटी हमारे खानदान में महिलाएं नौकरी नही करती।अब तू ही बता,तू तो … Read more

हम लोग भाग्यशाली है जो हमें समझदार बहू मिली – सोनिया अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

ट्रेन की बढ़ती हुई गति  सविता जी के मन को जोर जोर से धड़का रही थी की न जाने क्यों आज कौन सा मोड़ लेने वाली थी उनकी जिंदगी। उनके पोते अतुल ने अचानक ही जब हफ्ते भर पहले उन्हें गाजियाबाद आने का ट्रेन टिकट भेज कर बुला लिया था। अतुल शुरू से ही संकोची … Read more

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