प्रेम से सींचें रिश्ते – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

रामेश्वरी जी एक सीधी सादी, सुलझीं महिला थीं ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थीं ‌ग्रामीण परिवेश में हमेशा रहीं थीं किन्तु उनकी सोच, समझने की शक्ति निराली थी। वे किसी भी समस्या से घबरातीं नहीं थीं, वल्कि समाधान सोचने में जुट जातीं। उनके इसी गुण ने उन्हें परिवार, मुहल्ले में एक अलग स्थान दिया था।जब भी … Read more

घर की इज्जत का कुछ तो ख्याल रखा होता – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

लक्ष्मी घर की बड़ी बहू हर एक काम में बहुत होशियार कभी भी किसी काम में ना नकुल नहीं करती थी सविता की दो बहुएं दोनों पढ़ी-लिखे आई हुई थी देवरानी जेठानी मिलकर सुबह शाम का काम अपने हिसाब से कर लेती थी सविता ने दोनों के बीच कोई मन मुटाव न हो इसलिए उन्होंने … Read more

घर की इज्जत – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

होठों से बहता खून माथे पर ग़ुमड़ शरीर पर नीले नीले चोटों के निशान लिए सुरभि अपनी सास और ससुर के सामने खड़ी थी… शादी के तीन साल होने को आए पर हर चौथे दिन रमन मेरे साथ ऐसे हीं जानवरों सा व्यवहार करता है.. बताइए मम्मी जी पापा जी मैं क्या करूं… बिलखते हुए … Read more

एक दूजे के लिए – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi

दिसंबर का महीना  अपनी  अलसाई आँखें जल्दी खोलना नहीं चाहता था, ऐसे में भला सूरजदेव  भी नहीं दिखते  थे , और दिखते भी तो किसी बुजुर्ग स्वभाव  वाले मानव की तरह ठंडे, जिसे समय ने विनम्रता का चोला पहना दिया हो । खैर , मुझे तो उठना ही पड़ेगा ,सोचते हुए शुक्ला  जी उठ बैठे … Read more

दमयंती – पुरुषोत्तम : Moral Stories in Hindi

उसे याद भी नहीं कि पति के नकारा होने के बाद कब कोई उसे दमयंती नाम से पुकारा हो। अब तो वह भी किसी को अपना नाम बताती है तो दमड़ी ही बताती है। श्यामल पर गठीला शरीर, घाघरा-चोली और कंधे से घुमाके आगे बंधी ओढ़नी, चेहरे पर आत्मविश्वासी मुस्कान और माथे पर सब्जियों का … Read more

“अगला पड़ाव” – सीमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

बस में बैठी विजया ने दोनों हाथों से खिड़की थाम ली है, “बाहर कुछ भी तो नहीं बदला है, सब कुछ वैसा ही है, जैसा बार-बार मुझे स्मरण होता रहा है।” साथ बैठे लड़के ने उसकी ऑंखों में दुनिया भर की अजीबोगरीब प्यास भरी हुई देख कर, “क्या सोच रही हैं? आपके चेहरे पर दर्द … Read more

मुस्की – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

   चाचू — चाचू……दरवाजा खोलो ना… देखो तो आपकी मुस्की आई है…. प्लीज चाचू….. रोते-रोते दरवाजे पर मुक्का मारती हुई मुस्की थक कर वहीं बैठ गई ….!    आप जब तक बाहर नहीं आओगे मैं यहां से नहीं हटूंगी चाचू…. मुझे नहीं मालूम चाचू …..सही कौन है और गलत कौन है….? मम्मी पापा की बातों से लगता … Read more

परिवार और पड़ोस का अंतर – सीमा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

“छोटी, सब्ज़ी और सलाद वगैरह सब तैयार हैं। ऐसा करते हैं कि तुम चपातियां बना दो, मैं सबको परोस देती हूं।” स्मृति ने प्यार से अपनी देवरानी मनीषा से कहा।  “वाह भाभी, कितनी चालाक हैं आप! ताकि मैं रसोई में खड़ी रहूं और बाहर आप सबको भ्रमित कर सकें कि खाना आपने बनाया है।” मनीषा … Read more

घर की इज्जत – अमित रत्ता : Moral Stories in Hindi

“साढ़े छः फुट के तुम्हारे पिताजी पगड़ी पहनकर सिर झुकाकर चलेंगे तो कैसे लगेंगे? तुम्हारा छोटा भाई क्या लोगो के तानो के बाद जी भी पाएगा? तुम्हारी माँ किसी से नजर मिला पाएगी? कल को हमारी बेटी कोई गलत कदम उठाएगी तो उसे कैसे रोकेंगे वो सवाल करेगी तो क्या जवाब देंगे?”  मुझे नही पता … Read more

अपनों की पहचान – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“माँ ऽऽऽ” फोन पर बिलखती बेटी निशि की आवाज सुन सुनंदा जी घबरा गईं  कल तक तो सब कुछ ठीक ही था फिर अचानक रात को ऐसा क्या हो गया जो मेरी बेटी के हँसते खेलते परिवार को ग्रहण लग गया  “बेटा तुम चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा बस तुम हिम्मत मत हारना … Read more

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