अनकहा दर्द – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

जगन और मदन दोनों मुंजेरी गाँव में एक साथ मिलकर रहते थे । जगन की पत्नी सुमन डिलीवरी के लिए अस्पताल गई हुई थी उनका बड़ा बेटा राम घर पर चाची मौसमी के पास रुका हुआ था । मदन ने घर के अंदर आते हुए जोर से चिल्लाकर कहा राम तुम्हारा छोटा भाई हुआ है … Read more

मैं अपने अहंकार में रिश्तों के महत्व को भूल गई थी। – सीमा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

जैसे ही मोबाइल पर महेश नाम फ्लैश हुआ, तृप्ति ने झट से कॉल रिसीव किया, “भैया, कैसी हैं आस्था दीदी? ज्यादा तकलीफ में तो नहीं हैं?” “देख तृप्ति, तकलीफ तो है ही, किडनी डायलिसिस किया गया है। डॉक्टर ने कहा है कि जल्द ही किडनी ट्रांसप्लांट करना होगा। हम डोनर ढूंढ रहे हैं। पर तू … Read more

अनकहा दर्द – डाॅ संजु झा : Moral Stories in Hindi

 बारह वर्षीय मासूम अंश के चेहरे पर अचानक से अनकहे दर्द की बदली छा गई। माता-पिता की  आकस्मिक मौत ने अंश की मासूमियत छीन ली।अंश  के पिता की नौकरी मुंबई में थी और मॉं  की नौकरी  जयपुर में थी। दोनों अपने तबादले के लिए  प्रयासरत  थे,इस कारण अंश  दिल्ली के स्कूल  के हॉस्टल में रहकर … Read more

मैं अपने अहंकार में रिश्तों के महत्व को भूल गई थी। – मुकुन्द लाल : Moral Stories in Hindi

 अजेय अपने दफ्तर से छुट्टी लेकर अपनी पत्नी स्नेहा दोनों बच्चे धीर व साची के साथ अपनी छोटी साली प्रतिमा की शादी में शामिल होने के लिए ससुराल पहुंँचा । वहांँ घर में दाखिल होते ही अजेय, उसकी पत्नी और बच्चों ने भव्या(सासु मांँ) का चरणस्पर्श किया। उसने हल्की मुस्कान बिखरते हुए खुश रहने का … Read more

” खानदान की इज्जत ” – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” भैया एक महीने बाद अपनी निशु की शादी है आप सभी लोगों को कम से कम पंद्रह दिन पहले आना है क्योंकि आपको ही सब काम देखने है !” राजन पत्नी स्मिता के साथ अपने बड़े भाई निरंजन के घर आया और बोला। ” एक तो तुम्हारी बेटी अपनी पसंद से उस पंजाबी से … Read more

मैं अपने अहंकार में रिश्तों के महत्व भूल गई थी ।। – अदिति सिंह : Moral Stories in Hindi

अहंकार एक दिन सबको ले  डूबती है रामु पढ़ा लिखा एक समझदार व्यक्ति था रामु के साथ भरा पूरा परिवार था रामु एक स्कूल में सिक्षक था  बचपन से ही जिद्दी किस्म का इंसान था वो जो भी ठान लेता था वही काम  करता था रामू को साफ सुथरी चीजें पसंद थी उसके अनुसार अगर … Read more

दूर होने का कारण – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

“रूबी …सो रही थी क्या बेटा ? माफ करना मैंने उठा दिया ।दरअसल चाईबासा वाली कंचन चाची हैं न उन्हें कुछ काम से दिल्ली आना है तो वो तुम्हारे यहाँ भी आना चाह रही थीं , मैंने बोल दिया हाँ चली जाओ, किसी और के घर क्यों रुकना है जब मेरी बहु रूबी वहाँ है … Read more

नाटक – बीना शर्मा : Moral Stories in Hindi

“सुधा जल्दी से एक कप चाय बना कर ले आओ मेरे सर में बहुत तेज दर्द हो रहा है साथ में एक सिर दर्द की गोली भी ले आना” सुधीर ने शाम को ऑफिस से आने के बाद अपनी पत्नी सुधा से कहा तो सुधा चाय लाने की बजाए सुधीर को मुस्कुराकर छेड़ने लगी यह … Read more

एक थी कैटरीना – सीमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

यह भोपाल शहर की दोपहरी थी- ढ़लती हुई। सुपर्णा स्टेशन से बाहर निकल आई। रोड पर दिन का सूनापन पसरा है। सुपर्णा अपना छोटा सा बैग उठा कर सड़क पार कर गई। उसे युनिवर्सिटी ऑफिस जाना है, लेकिन इस भरी दोपहरी में उस ओर जाने वाली एक भी बस नजर नहीं आ रही है। मुसीबत … Read more

अति विश्वास भी ठीक नहीं – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 ” मालती..ज़रा अपनी बेटी पर ध्यान दो..सुना है, कल रात वो सात बजे घर लौटी थी… इतनी देर तक भला कौन-सा स्कूल खुला रहता है।कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारी साख पर #बट्टा लग जाये और तुम देखती रह जाओ…। ” मालती अपनी बेटी काव्या को गेट तक छोड़ने के लिये जैसे ही निकली तो … Read more

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