स्वार्थी बहन – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

सिया.. क्या तुम सच में अविनाश से प्रेम करती हो, देखो सिया.. मैं तुम्हारी बड़ी बहन होने के नाते तुम्हें समझा रही हूं तुम अविनाश से दूर ही रहा करो माना की अविनाश एक अच्छी कंपनी में काम करता है और उसका घर परिवार भी काफी जाना माना है किंतु मैंने सुना है उसके पहले … Read more

कुछ मजा नहीं आया – बिमला महाजन : Moral Stories in Hindi

आज उसकी शादी की सालगिरह है । किसी की विवाह की वर्षगांठ हो या जन्मदिन  महिला-मंडल की सब महिलाएं मुबारक बाद देने ज़रूर आती हैं। सब लोग मिलकर एक छोटी सी पार्टी इन्जाय करते हैं।। उपहारों के आदान-प्रदान की सख्त मनाही है, इसलिए सब लोग बेझिझक होकर एक दूसरे के घर आते हैं । इस  … Read more

अनकहा दर्द… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

यामिनी सेन की लाश पंखे से लटक रही थी… सुधांशु दत्ता उसका पति जमीन पर लाचार बैठा था… पुलिस आने वाली थी… पूरा घर पड़ोसियों से भरा पड़ा था… सुधांशु की मां अनंदिता जी… अभी भी चुपचाप आंगन के दरवाजे के पास पड़ी कुर्सी पर… मुंह पर आंचल रखे बैठी थी… उस बेचारी को तो … Read more

संस्कार – शालिनी श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

जब हम दोनों भाई छोटे थे ,तो अक्सर पिता जी डांट कर, सजा देकर हमें हमारी गलती का एहसास करवा दिया करते थे और तब पिता जी की डांट से बेइजती महसूस नहीं होती थी… आज समय कितना बदल चुका है… पिताजी को हमसे जरा सी बात भी करनी होती है ,तो वह हमसे समय … Read more

दोहरा दर्द – अंजना ठाकुर : Moral Stories in Hindi

पूजा  जिस दिन से शादी हो कर आई तभी से उसकी सास निर्मला जी जल्दी से दादी बना दो बस यही बात कहती रहती जिसे सुनकर पूजा शरमा कर रह जाती। लेकिन जैसे जैसे वक्त बीत रहा निर्मला जी अब बात से जिद्द पर आ गई दो साल हो गए थे अब पूजा को भी … Read more

अब दर्द सहा नहीं जाता। – अर्चना खंडेलवाल : Moral Stories in Hindi

शिरीष तुम्हारे मौजे यही पर रखे हैं और तुमने मुझे पुरे घर में घुमा दिया, एक मौजें भी तुमसे संभाल कर नहीं रखे जाते हैं, आजकल तुम भुलक्कड़ हो गई हो, शिरीष ने तंज कसा और तैयार होने लगा। ये सुनकर स्वाति को बड़ा बुरा लगा, उम्र तो ज्यादा नहीं थी, पचास की पार होने … Read more

कुछ गुनाहों का प्रायश्चित नहीं होता – पूजा दत्ता : Moral Stories in Hindi

सारा काम ख़त्म करके चाय का कप लेकर बालकनी में बैठी ही थी कि दरवाज़े की घंटी बजी… इस समय कौन आया होगा, सोचती हुई गेट पर गई तो मेरी बचपन की सहेली सुमेधा सामने खड़ी थी। “अरे सुमेधा, तुम… आओ ना… कितने दिन बाद आई हो…” उसे बिठाकर मैं उसके लिए भी एक कप … Read more

गुरु दक्षिणा – विनय मोहन शर्मा : Moral Stories in Hindi

देवव्रत शास्त्री शहर में एक माध्यमिक विद्यालय में हिंदी के शिक्षक थे। उनको छात्र मास्साब कहकर संबोधित करते थे। वह अपने छात्रों से पुत्रवत स्नेह रखते थे और उनकी गल्तियों पर उन्हें डांटने के स्थान पर स्नेह पूर्वक समझाते। अपने छात्रों को पढ़ाने में बहुत मेहनत करते थे, जिसका ही परिणाम था कि उनके विद्यालय … Read more

कुछ गुनाहों का प्रायश्चित नहीं होता – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

सीधे सीधे चलते चलते अचानक रोड चारों दिशाओं में बंटने लगी। इधर देखा उधर देखा कोई साइन नजर ही नहीं आया। उतर दिशा की ओर बड़ी बड़ी बिल्डिंगे खड़ी थी जिसके गलियारे एकदम शांत थे। बालकनी से कुछ कुछ बच्चे झाक रहे थे पर आवाज उनकी भी नहीं आ रही थी। किसी किसी बालकनी से … Read more

मां बाप का आशीर्वाद से बड़ा कुछ भी नहीं है – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

मांजी सूप पी लीजिए ,अरे बेटा मन भर गया है अब तो सूप वूप से । कितना पीऊं अब तो ऊब गई हूं मैं इस बिस्तर पर पड़े पड़े।ऊपर वाला मेरी सुनता क्यों नहीं है ।नहीं मांजी ऐसा न कहें, आपके आशीर्वाद की आपके साथ की तो अभी हम लोगों को बहुत ज़रूरत है । … Read more

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