“जिम्मेदारी समझदार बना देती है” – अनिता गुप्ता
“दादी ! जल्दी से खाना दे दो। हमारे छत पर जाने का समय हो गया है।” विनीत और विनिता ने एक साथ कहा। ” हां बच्चों ! आ जाओ । खाना तैयार है।” दादी ने नम हुई आंखों को पोंछते हुए कहा। ” ये क्या दादी ? आप का खाना कहां है ?” दो प्लेट … Read more