कल और आज – रीता मक्कड़

एक वक़्त था जबकितना सोचती थी  नीरजा हर दम सुधीर के बारे में। सोचती थी कितना व्यस्त पति है जिसके पास अपनी पत्नी के लिए थोड़ा सा वक़्त ही नही है।अपनी सहेलियों और अड़ोस पड़ोस की औरतों को देखती तो उसको मन ही मन जलन होती कभी पति के साथ मूवी देखने जा रही हैं … Read more

खोखले रिश्ते ” – सीमा वर्मा

छोटे से शहर दरियापुर के मनोहर लाल की शादी उनके पिता ने कम ही उम्र में जब वे पढ़ ही रहे थे तभी कर दी थी। फिर जल्दी ही दो बच्चे भी हो गये। लेकिन पत्नी शकुन के सयानेपन ,अनुशासन और मितव्ययिता के भरोसे मनोहरलाल अपने अध्यन और चितंन की दुनिया में फिर से लीन … Read more

कुयें की बेटी कहानी –   

मीनू ने जैसे ही तीसरी बेटी को जन्म दिया घर में कोहराम मच गया। उसका पति सोमेश तो उसे मार ही देता अगर उसकी सास शन्नो देवी ने उसे  छुड़वाया  न होता ।वह सोमेश से बोली,” जेल में जाएगा और पता नहीं कितने सालों की जेल हो जाए। तू इसको छोड़, मैं देखती हूं। इसका … Read more

साँची – कंचन शुक्ला : Moral stories in hindi

संचिता रोरोकर बेहाल हुई जा रही है। सचिन को तो जैसे काटो तो खून नही। समझ नही आया कि कौन सा निर्णय गलत था?? पीछे मुड़कर देखते, सोचते विचरते तो लगता सब करने के पीछे नीयत तो गलत नही थी फिर गड़बड़ी कहाँ हुई?? बैंगलोर में दोनों नौकरी कर रहे थे। जब संचिता गर्भवती हुई … Read more

मम्मी के सपने .. –   रंजू  भाटिया 

उफ्फ्फ्फ़ !!!”पापा जी इसको इस वक्त यह राजकुमारी की कहानी मत सुनाओ !! इसके दिमाग में फ़िर यही घूमता रहेगा ,इतनी मुश्किल से अभी इसको परीक्षा के लिए याद करवाया है ..आप यह पेपर लो इस में इसके जी .के कुछ सवाल हैं खेलते खेलते इसको वही रिवीजन करवाओ !! “”पेपर अपने ससुर को दे … Read more

तमन्ना – शिखा कौशिक

कितने रंग है दुनिया में लेकिन तुम तो बस अँधेरे में खो जाना चाहती हो जिसमे केवल काला रंग है .मै तुम्हारे दुःख को जानती हूँ लेकिन इस तरह जीवन को बर्बाद करना तुम्हारी जैसी गुनी लड़की को शोभा देता है क्या ?  तमन्ना अपने को संभालो !आज पुनीत से अलग हुए तुम्हे पूरे 6माह … Read more

बचपना – शिखा कौशिक 

एक वर्ष हो गया सुभावना के विवाह को ,मेरी पक्की सहेली . बचपन से दोनों साथ -साथ स्कूल जाते ,हँसते ,खेलते पढ़ते .कभी मेरे नंबर ज्यादा आते कभी उसके लेकिन दोनों को एक दूसरे के नंबर ज्यादा आने पर बहुत ख़ुशी होती .एक बार मैं तबियत ख़राब होने के कारण स्कूल नहीं जा पाई तब … Read more

मक्खनबड़े – नीरजा कृष्णा

माधवी की मायके जाकर होली खेलने की अतीव इच्छा इस साल पूरी हुई। पाँच सालों के बाद वो सपरिवार आगरा पहुँची थी। इतने लंबे सफ़र की थकान के बाद सुबह आँखें खुलीं तो रसोईघर से आती खटर पटर की आवाज से चौंक गई… अरे इतनी सुबह कौन हैं। दीवार घड़ी पर निगाह पड़ी तो अभी … Read more

बड़ी बहन – नीरजा कृष्णा

हर साल गर्मी की छुट्टियों में माँ के घर दोनों बहनें कुछ दिनों के लिए मिलती थीं। बड़ी बहन सीमा ज़रा बड़े घर की बहु थी और ठसके वाली थी, इसके विपरीत छोटी सविता साधारण हैसियत वाली थी। सीमा छुटकी और उसके बच्चों के लिए बहुत बढ़िया कपड़े और ढ़ेरों दूसरे सामान लाती थी। कल … Read more

आंतरप्रेन्योर – कंचन शुक्ला

शोभा अपनी माँ से- अम्मा!! कलेक्टर साहब और परधान का जलवा देखी हो। कितने लोग उनकी गाड़ी के आगे पीछे चलते हैं। सर!! सर!! कहते नही थकते। उनके एक आदेश पर, हैया दैय्या करके दौड़ते हैं। हमको भी ऐसा ही कुछ बनना है। अम्मा सोभा से- आज हम सप्तमी का व्रत किये हैं, तेरे लिए। … Read more

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