श्रीमती की…तारीफ – विनोद सिन्हा “सुदामा”
आज़ तो घर में मानों बवाल कटने से बची थी.. हुआ यूँ कि.. मैंने जैसे ही श्रीमतीजी के हाथों की बनी चाय की पहली चुस्की ले अखबार हाथ मे लिया.. मेरे मुँह से…..आहहहा व वाहहह दोनों स्वर एक साथ निकलें.. बता दूँ कि मेरी श्रीमती जी चाय बड़ी अच्छी बनाती थी… मानों कोई जादू हो … Read more