एक खामोश सा बंधन – गीतू महाजन
भोर का उजाला हो चुका था। रोज़ की तरह अपनी आदत अनुसार कामिनी जी उठी और स्नानादि कर मंदिर की ओर निकल गई। पिछले कई सालों से उनकी यही दिनचर्या थी।सुबह मंदिर से आते हुए गौशाला होते हुए आना।उनकी यह दिनचर्या शायद तब से थी जब से वह ब्याह कर चौधरी खानदान की बहू बनी … Read more