श्राद्ध – डॉ अंजना गर्ग
“मां ! परसों बाबू जी का श्राद्ध है ।तुम दिल्ली आ जाओ। इस बार यही करेंगे “। जितेंद्र टेलीफोन पर मां को कहता है । “बेटा ,हर बार गांव में करती तो हूं । इस बार भी यही कर लेती हूं “। ” नहीं मां तुम कल आ जाओ । मैं गाड़ी और ड्राइवर भेज … Read more