जीवन का एक सफहा – अंजू निगम

आज भी जब ऊँची-नीची सड़कों को नापती हूँ और दूर, ऊबड़-खाबड़ हो गये ठीकरों में बने पुराने बरैक्स देखती हूँ तो जिदंगी के कई पन्नें खुद-ब- खुद खुलते जाते है, अपना अतीत दोहराने। मुझे कभी ये दोहराव बुरा नहीं लगा। कभी कभी मन बेलौस सा मचल उठता , उसी किशोर वय में पहुँच, हिरनी सी … Read more

श्राद्ध की परिभाषा – अनुज सारस्वत

  “बेटा चलो जल्दी नहा धोकर तैयार हो जाओ पंडित जी आने वाले होंगे आज दादा जी के श्राद्ध है ना” अमित ने अपनी 7 वर्षीय बेटी श्रुति को  बोला , पूरा परिवार नहा धोकर तैयारी में लग गया, अमित पंडित जी के द्वारा बताई गई सामग्री के साथ तर्पण की व्यवस्था करने में जुट … Read more

डायरी के पन्ने – नीतिका गुप्ता 

रणदीप काफी देर से मंगला की फोटो को एकटक  देख रहा था….. जैसे कि उसे शिकायत कर रहा हो कि क्यों जीवन के सफर में उसे इतनी जल्दी अकेला छोड़ कर चली गई ….?? रणदीप के हाथ में मंगला की लिखी हुई डायरी थी जो वह अपनी बेटी रुही के जन्म के बाद से लिखती … Read more

 किन्नर का अपमान – Moral Story In Hindi

” मैं किन्नर हूं, हां सुनो सब मैं किन्नर हूं, किन्नर” शीला आज रो-रोकर बेहाल हो रही थी, उसकी गोद में एक लगभग बारह साल की बच्ची की लाश पड़ी है, जो खून से लथपथ है,  जो भी  पास आता उसे झटक कर धकेल देती बहुत दूर, बस यही बोले जा रही थी। ” मैं … Read more

बीबी जी गरीब हूँ पर चोर नही – किरन विश्वकर्मा

सुमित्रा के पति का देहांत हो गया और कमाने का कोई जरिया नहीं दिख रहा था….पति के रहते हुए तो उन्हे कोई समस्या का सामना नही करना पड़ा था पर अब घर सम्भालने के साथ साथ घर को चलाने की भी समस्या आ रही थी…..दो बच्चे थे उन्हें पढ़ाना भी था, घर भी चलाना था। … Read more

दामाद अपना बेटी पराई – स्मिता सिंह चौहान

“दामादजी को  वक़्त नहीं मिल पा रहा है तो तुम चली जाओ। इतने वक़्त तक अपना घर छोड़ना ठीक नहीं है। दामादजी का फ़ोन आया था ना  कल तुम्हारे पास क्या कह रहे थे?” ममता जी ने अपनी बेटी सीमा के हाथ से सुबह की चाय के कप लेते हुए कहा। “क्या माँ आप भी … Read more

“संतोष ” – गोमती सिंह

अप्रैल का महीना था शाम का समय घुप ढल चुका था । आँगन में लगे तखत पर नंदिनी बड़ी माँ विस्मित चेहरे से बैठी हुई थी । और सोंच रही थी –कभी इस घर आँगन के कोने कोने में खुशियाँ बिखरी रहती थी , जो जानें कैसे रूठ गई । आज घर के कोने कोने … Read more

भिंडी के फूल – मंजू तिवारी

बात काफी पुरानी है। जब अमिता और नमिता एक मांटेसरी प्राइवेट स्कूल में पढ़ा करती थी उनका स्कूल फर्स्ट फ्लोर पर लगता था सारे बच्चे घर से टिफिन लेकर आया  करते थे लेकिन उसमें अधिकतर टिफिन के साथ पानी वाली बोतल नहीं लाते थे छात्र  छात्राओं की पानी पीने की व्यवस्था स्कूल के नीचे लगे … Read more

पर्यावरण और हम – राम मोहन गुप्त

शाश्वत संकल्प और अथक प्रयास से ही पर्यावरण संरक्षण संभव है हाल ही में हुई अमरनाथ धाम की त्रासदी, देश-विदेश में बाढ़ से तबाही, दरकते पहाड़, देश-दुनिया में पड़ रही भीषण गर्मी, सुलगते जंगल आदि अनेकों उदाहरण हैं जो कि सिध्द करते हैं कि प्रकृति से की गई छेड़छाड़ और संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का … Read more

आर्कमिडीज का डूबता जहाज (नॉलेज)  – मंजू तिवारी

अपने वजन के घनत्व के बराबर जहाज पानी को हटा लेता है और समुद्र में तैरता रहता हैजबकि एक लोहे की कील उसी पानी में डूब जाती है इसे समझने में रमा को बहुत ही अच्छा लगता था वह सोचती चलो ज्यादा पढ़ना नहीं पड़ेगा समझने की चीजें उससे अच्छी लगती किसी चीज को समझना … Read more

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