जीवन संध्या – कुमुद मोहन
क्या मम्मी! आपको घंटी नहीं सुनाई देती क्या? कितनी देर से बेल बजा बजाकर थक गए और आप हैं कि जरा सा दरवाजा खोलने में घंटों लगा देती है झुंझलाते हुए शशांक और सानवी भड़भड़ाकर अंदर घुसे। बेटा! मुझसे अब भाग कर दरवाजा नहीं खोला जाता कमरे से बाहर आने में टाइम लगता है गठिया … Read more