मान-सम्मान-अपमान – अरुण कुमार अविनाश
“जीजा जी, एक रिक्वेस्ट थी।”– सूरज बाबू ने मोबाइल फोन पर कहा। “जी बोलिये।”– आशीष जी ने छोटे साले की आवाज़ पहचान कर बोला। सूरज बाबू मोबाइल पर भी कुछ देर तक सोंचते रहें कि बात शुरू करें तो कहाँ से करें । दरअसल बात बहुत ही संवेदनशील थी। घर की इज़्ज़त का सवाल था। … Read more