स्नेह बंधन – पायल माहेश्वरी

” कितनी सुन्दर और सुहानी सुबह हैं,हवा में कितनी ताजगी हैं, पहाड़ो पर गिरती बर्फ काँच की तरह साफ और चमकदार लगती हैं महानगर के दौड़ते-भागते जीवन में अब ऐसे सुकून के पल कहा मिलते हैं ” सीमा अपने पति नयन से बोली । ” बिलकुल सही कहा तुमने सीमा इसी नैसर्गिक सौन्दर्य-दर्शन के लिए … Read more

” भूखिन ” – गोमती सिंह

 दिसंबर का महीना था।  सुबह के 7 बज चुके थे, आज भूखिन को सुबह उठने में देर हो गई थी।  वह जल्दी जल्दी बर्तन धो रही थी।  भूखिन को उस घर में काम करते हुए लगभग 25 वर्ष हो गये थे । उस घर में कितने गिलास कितने चम्मच यथा कितने कटोरियां आदि रोजमर्रा में … Read more

अपने तो अपने होते हैं –   गरिमा जैन

विमला, बिन्नू आंटी कितनी अच्छी है जैसे ही मैं उनके घर जाती हूं झट से मेरे लिए टीवी ऑन कर देती हैं और एक मां है जब भी टीवी देखने बैठो बस पढ़ाई करो का रोना लेकर बैठ जाती हैं ।होमवर्क किया कि नहीं? टेस्ट की तैयारी कैसी चल रही है? काश बिन्नु आंटी मेरी … Read more

दिल के बहुत क़रीब हो तुम – सुषमा यादव

जिंदगी में कुछ ऐसे भी प्यारे रिश्ते बन जाते हैं,जो ख़ून के रिश्तों से कहीं ज्यादा आपके जीवन में महत्वपूर्ण हो जाते हैं,, उनकी बराबरी कोई अन्य सगे रिश्तेदार नहीं कर सकते हैं,, उनके प्रेम के आगे हम सदैव नतमस्तक रहते हैं,,उनकी मेहरबानियां हम ताजिंदगी नहीं भुला सकते,, ऐसा ही एक बहुत ही प्यारा दिल … Read more

स्वाभिमानी – बरखा दुबे शुक्ला 

“मम्मी आपका लाड़ला बेटा शादी के लिए माना कि नही ,मेरी जेठानी को क्या जवाब दूँ , वो उसके लिए अपनी भतीजी के लिए बोल रही है ।”लीना ने पूछा । “बेटा मैं तो समझा – समझा कर हार गई ,पर उसे तो बस सीमा से ही शादी करनी है ।”लीना की मम्मी बोली । … Read more

मम्मी जी ,मैं घूंघट नही हटाऊँगी  – रिंकी श्रीवास्तव

सुनो बड़ी बहु , मालति मामी का फोन  आया है ,अगले हफ्ते उनकी  बहु  की  गोदभराई की रस्म है ,तो हम सभी को बुलाया है ,कह रही थी कि भतीजे की शादी के बाद से आप आयी नही ,इस बार सबको आना है ,सुनीता जी बोली | अगले हफ्ते !पर मम्मी जी अगले हफ्ते तो … Read more

भगवान का दूसरा रूप – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज रागिनी के बेटी खुशी 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद बैंगलोर हॉस्टल में रहने जा रही थी। आज पहली बार वो घर से बाहर की दुनिया में कदम रख रही थी।आजकल वैसे भी सबके एक या दो बच्चें होते हैं जिनको बहुत ही नाज़ो से पाला जाता है। रागिनी खुश थी,कि बेटी का … Read more

“पापा! – विनय कुमार मिश्रा

 दूसरी नयी साइकिल दिला दो ना” मैं समझ सकता हूँ। साइकिल थोड़ी पुरानी हो गई है। इसी से स्कूल और ट्यूशन जाता है। बेटा बोल रहा था बार बार चेन उतर जाता है इसका।पर अभी नई दिला पाना थोड़ा मुश्किल है। बेटे को लेकर साइकिल दुकान उसे ठीक कराने गया। साइकिल दे हम वहीं बैठे … Read more

सार्थक बुढ़ापा –     डॉ अंजना गर्ग

शांति पति की मृत्यु के बाद बेटे बहू के साथ महानगर में आ गई। जीवन एकदम बदल गया था। पति का साथ तो छूटा ही,साथ ही 40 साल की जमी जमाई गृहस्थी और घर भी छूट गया। साथ ही छूट गया अड़ोस पड़ोस और सहेलियां भी जो  हर दुख सुख में साथ रहती थी। यहां … Read more

सही फैसला –  डॉ अंजना गर्ग

इंदु और बिंदु गांव से रोज शहर पढ़ने आती थी दोनों ही निम्न मध्यम परिवार से थी। परंतु घरवाले किसी भी तरीके से उनको शहर मे पढ़ा रहे थे ।कॉलेज से एक ट्रिप नैनीताल जा रहा था इंदु और बिंदु भी उसमें जाना चाहती थी परंतु दोनों के माता पिता ने कहा कि कॉलेज तक … Read more

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