“चांद के पार चलो” करवाचौथ (स्पेशल कहानी) – रीमा महेंद्र ठाकुर A
दीपक की लौ”अचानक तेज हो गयी “ काव्या की आंखे भर आयी ” वो सोघने लगी क्या इसबार मेरा चांद मुझे फिर नहीं नजर आऐगा ” पिछली बार की तरह “ चार बरस हो गये, काव्या की आंखों से झर झर आंसू गिरने लगे “ वो उठकर खडी हो गयी! मंदिर से अटैच अपने रूम … Read more