अपनों के होते हुए अकेलापन आखिर क्यूँ? – ज्योति आहूजा

आज राधेश्याम जी के परिवार में हर तरफ ठहाकों की गूँज सुनाई दे रही थी। राधेश्याम  ग्रोवर जी, नोएडा में रहने वाले एक व्यापारी थे और अपनी पत्नी सुजाता संग जिंदगी के ये वर्ष अकेले व्यतीत कर रहे थे। यूँ कहें तो परिवार बड़ा था, दो बेटे समीर और विशाल नौकरी के चलते शादी के … Read more

शिखर – ऋतु अग्रवाल

   “माँ! एक बात पूछूँ?” मीना ने अपनी माँ लाली से पूछा।         “हाँ, हाँ,बिटिया रानी पूछो ना!” लाली ने मीना के सिर पर हाथ फेरा।         “क्या तुम्हारा मन नहीं करता कि तुम कभी नयी साड़ी पहनो?” मीना ने लाली की आँखों में झाँकते हुए कहा।        “बिटिया, मन का क्या है? मन तो बहुत कुछ करे है। … Read more

आज से मैं ही तुम्हारी मॉं हूॅं….. – भाविनी केतन उपाध्याय 

अपनें तो अपने होते हैं पर पराया भी कैसे अपना बन जाता है ये मैं अपने निजी अनुभव के तहत आप सबसे सांझा करने की कोशिश की है। मेरी सासूमा और मैं यानि कि रीमा दोपहर में टीवी देख रहे थे कि अचानक से डोरबेल बजी, हम दोनों ने एक दूसरे के सामने देखा कि … Read more

छोटा भाई   – डाॅ  उर्मिला सिन्हा

 तेल की धार और समय की मार में एक समानता है। तेल  नीचे की ओर बहता है और समय की मार जब पड़ती है  तब अच्छे अच्छों की बुद्धि काम नहीं करती।       हरिबाबू और उनकी पत्नी रमादेवी एक दूसरे को देखते और आहें भरते।      रमादेवी  जो अपने पति की ऊंची हैसियत ऊँचे पद और बेशुमार … Read more

भईया बताया तो होता ,,क्या  हम आपके अपने नहीं थे  – मीनाक्षी सिंह 

शंभू – हेलो नरेश  ,,तूने कुछ सुना क्या भाई साहब को ड़ेंगू हो गया हैं ! वो अस्पताल में भर्ती हैं !  नरेश – क्या बोल रहे हैं भाई साहब आप ,,बड़क्के भाई साहब से कुछ दिन पहले तो मिलकर आया था ,,सब कुछ कुशल मंगल था ! भाई साहब भी स्वस्थ लग रहे थे … Read more

बड़े दिल वाली (निशा) – सपना शर्मा काव्या

मेरी यह कहानी एक सच्ची कहानी पर आधारित है। बस नाम और जगह बदल दी है। इस कहानी की सूत्रधार मैं ही हूं क्यू की जो हुआ मेरे सामने ही हुआ तो मैं अब कहानी पे आती हूं। मै सपना शर्मा जो पेशे से एक वकील भी हूं और नोएडा में रहती हूं। अभी कुछ … Read more

लिपट गई – कंचन श्रीवास्तव

भरपूर पति का प्यार, सुख सुविधा,मिलने के बाद भी राधा के चेहरे पर वो चमक नहीं है जो एक नई नवेली ब्याहता स्त्री के चेहरे पर होना चाहिए और अब तो साल के भीतर ही एक बेटा भी हो गया,और कहते हैं ना कि बेटियां कितना भी बढ़ती उम्र के साथ मां बाप के लिए … Read more

ऐसी विदाई हो तो.. – प्रियंका मुदगिल

“भाभी! आपकी लाडो मिली की शादी की डेट फिक्स हो गई है लड़केवालों ने कहा कि उन्हें सादे तरीके से ही शादी करनी है….इसलिए जब  देखने आए तभी  अंगूठी पहनाकर शगुन कर गए…..आप आएंगे ना…””संगीता ने अपनी जेठानी रजनी को फोन पर कहा। रजनी :- “”जब इतना सबकुछ कर ही लिया है तो शादी भी … Read more

संकटमोचक – डॉ. पारुल अग्रवाल

जब करोना का प्रथम लहर आई तो हम लोगों में किसी ने नहीं सोचा था कि ये छोटा सा सूक्ष्मदर्शी इतना विकराल रूप धारण कर लेगा और पूरी दुनिया को अपने आतंक से हिला से देगा । प्रथम लहर में लगा लॉकडाउन जिसे हम सबने थोड़े दिन की बंदिश समझा था और सोचा था चलो … Read more

अपने तो अपने होते ही हैं पराए भी अपने बन जाते हैं। – श्रद्धा खरे

आज जब मेरे  छोटे बेटे ने मुझे जन्मदिन पर उपहार स्वरूप  इनोवा गाड़ी की गिफ्ट की, तो मेरा मन कई साल पहले अतीत में चला गया। अतीत अपने पीछे बहुत कुछ छोड़ जाता है। ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ बात उन दिनों की है जब मेरे पतिदेव हॉस्पिटल में लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी … Read more

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