अतीत – विनय कुमार मिश्रा

“माई! सरदार जी आये हैं, तुम्हें ढूंढ रहे हैं” “कौन सरदार जी?” “वही गुरुद्वारे वाले, जो कभी कभी भंडारा रखते हैं” इतने बड़े आदमी को मुझ गरीब औरत से क्या काम आन पड़ी, या कुछ गलती हो गई हमसे। मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। “अच्छा सुन तू ये भात उतार लेना, मुन्ना … Read more

 सागर की लहर जैसा होना भी जरूरी कभी तेजी कभी शान्त•••••• – अमिता कुचया

नीता बिल्कुल हताश चुकी थी। क्योंकि हर समय घर की जिम्मेदारी के साथ  कहीं कुछ ग़लत हो जाए तो उसे ही दोषी ठहराया जाना, कहीं कुछ हो उसे ही सुनाया जाता। हर समय अपमान नहीं सह सकती थी।अब उसे लगा कि बहुत हुआ। एक दिन की बात है बहुत समय  बाद  नीता  की फोन पर … Read more

एकाकीपन…… – विनोद सिन्हा “सुदामा”

आज तुम्हें गए पूरा एक वर्ष हो गया…बस में होता तो शायद रोक लेती तुम्हें,लेकिन मैं जानती हूँ ..चाहकर भी नहीं रोक सकती थी तुम्हें…..और सच कहूँ तो कभी सोचा भी नही था कि ऐसे जाओगे तुम…साथ अपने इतना दर्द इतनी वेदना लेकर और मुझे दुनिया जहाँ का दर्द देकर… जाना अपने आप में एक … Read more

वो अनमोल खाना – ज्योति अप्रतिम

अरे सुरेश बात सुन !हेड ऑफिस से अभी अभी एक सर्कुलर आया है।हम दोनों को एक मीटिंग अटेंड करनी है भोपाल में। मैंने अपने कलीग से कहा। भोपाल में ! इतनी दूर ! कब जाना है? सुरेश ने बहुत परेशान होते हुए कहा। हाँ भाई ,तूने सही सुना है।भोपाल ही जाना है  वह भी कल … Read more

अपमान जनक – पुष्पा पाण्डेय

गोविन्द अब प्रशासनिक अधिकारी बन गया है। पढ़ने में ठीक-ठाक ही था फिर अनुसूचित जनजाति का कोटा उसे उच्च अधिकारी बना ही दिया। माता-पिता अपने व्यवसाय से अभी भी उसी तरह जुड़े रहे जैसे पहले थे। गाँव के शादी- व्याह में ढोलक बजाने का काम करते थे। बेटा को ये काम अपमान जनक लगता था, … Read more

मर्यादा  – अभिलाषा कक्कड़

आप सब लोग अपने घर जाये । डाक्टर साहब को कोई ज़रूरी काम आन पड़ा है इसलिए वो चले गये । आप सब को कल देखेंगे..  पिछले एक घंटे से बैंच पर बैठे सीमा और आकाश का ध्यान अचानक से चपरासी ने अपनी ओर खींचा ।आकाश और सीमा कुरुक्षेत्र से दिल्ली अपने किसी दोस्त की … Read more

ठंड बहू को भी लगती है!! – मनीषा भरतीया

इस बार ठंड कड़ाके की पड़ रही थी…..सक्रांति भी चली गयी…माही चौथ भी चली गई…. पर ठंड जाने का नाम नहीं ले रही थी…. हर बार तो सक्रांति के पश्चात ठंड एकदम से कम हो जाती है लेकिन इस बार तो ठंड ने जैसे हालत खराब करके रखी थी…. पानी में हाथ देने भर से … Read more

काश ऐसी दादी मेरे बच्चों की भी होती… – रश्मि प्रकाश

अपने बेटे को बस स्टॉप पर पहली बार छोड़ने आई निवेदिता देख रही थी वहाँ पर सब बच्चे या तो अपनी मम्मी के साथ खड़े हैं या फिर पापा के साथ पर एक लड़की किसी बुजुर्ग महिला के साथ खड़ी थी वो शायद उसकी नानी… दादी … या फिर कोई और होंगी । कुछ पुराने … Read more

आज सही मायने में मुझे बेटी मिली – संगीता त्रिपाठी

जिंदगी भर जिसकी कद्र नहीं की,” आज  न जाने क्यों उसकी यादें, मेरी आँखों में आँसू भर रहे हैं..?, “तुम सही कह रही, राधा,.। आखिर हीरे की परख जौहरी ही तो करता हैं, पर हम हीरे की परख समय बीत जाने के बाद कर पाये..।               जो बहुएँ, आपकी नौकरी तक, हमारे आगे -पीछे घूमती … Read more

 मम्मी जी! मुझे तो पीरियड्स आने वाले हैं – ज्योति आहूजा

“आरती! ओ आरती| कहां चली गई? सुनती है या नहीं?” सुलेखा जी ने बहू आरती को जोर से चिल्लाते हुए आवाज़ दी|  “पता नहीं क्या कर रही है?” इतने में आरती भागी चली आती है|  “जी मांजी, आपने बुलाया?” आरती ने कहा| “क्या कर रही थी जी की बच्ची? कब से आवाज दे रही हूं!” … Read more

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