खुशियाँ लौट आई – उमा वर्मा 

घर में टीवी पर कोई अच्छा सिनेमा चल रहा था ।हम सब, अम्मा, बाबूजी, भैया और भाभी सब लोग आनन्द उठा रहे थे कि अचानक भैया के सिर में तेज दर्द होने लगा और उन्हे उल्टियाँ होने लगी ।जबतक अस्पताल ले जाने की तैयारी होने लगी तो भैया दुनिया से चले गये । घर परिवार … Read more

आखिर काजल ने अपनी मर्यादा तोड़ ही दी – मीनाक्षी सिंह

रवि – काजल तुम समझती क्यूँ नहीं ,,तुम्हे तुम्हारे घर वाले बिल्कुल प्यार नहीं करते ,,वो हमारे रिश्ते के लिए कभी राजी नहीं होंगे ! काजल – रवि ,,तुम्हे तो पता ही हैं बचपन में मुझे जन्म देते ही मेरी माँ खत्म हो गयी,,पिताजी ने पालपोष कर दस साल का किया ,,तब उन्हे कैंसर हो … Read more

उम्मीद से परे… – संगीता त्रिपाठी

” पापा मै इंजीनियर नहीं, होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करना चाहता हूँ।” पागल हो गया हैं, एक उच्च पदस्थ अधिकारी का पुत्र, होटल में बैरा बनेगा, लोगों की जूठी प्लेट हटायेगा..। पिता रामेश्वर जी की गरज में, अनुज की आवाज दब गई। एक आम भारतीय परिवार की सोच वाला अनुज का परिवार भी था। पिता … Read more

आखिरी उम्मीद – प्रेम बजाज

15 दिन से हर वकील, पुलिस के पास, इन्साफ के लिए भटक रही है। पहले तो थाने में बलात्कारी के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने जब गई तो थानेदार ने लम्बा चौड़ा भाषण दे दिया। “अरी कमला रानी, किसके खिलाफ रपट लिखाने चली है तू, तुझे पता है ना वो कितने बड़े बाप का छोरा है, तू … Read more

ठंड के लड्डू – किरण केशरे

मधुसूदन जी और राधिका आँगन की धूप में बैठे अदरक की चाय की चुस्कियां ले रहे थे,, पूस की रातें वैसे भी बहुत ठंडी ही रहती है, गरम कोट और शाल में भी सर्द हवा अंदर घुस ही जाती है।  इस बार लड्डू नही बन पाए थे राधिका जी से,, जो दोनों को ही बहुत … Read more

सपना वीर्य बिंदु का” – भावना ठाकर ‘भावु’

रिश्तेदारों की गपशप मेरे कानों में गर्म शीशा घोल गई! अरे ये क्या, बेटी हुई? काश मालती ने किसी खानगी डाॅक्टर को रिश्वत देकर लिंग परिक्षण करवा लिया होता, समय रहते निकाल कर पाती। आजकल बेटियों का बोझ कौन सह पाता है। दूसरे ने कहा, “सही बात है किसी और परिवार के लिए बच्चियों को … Read more

धरा की उम्मीद – कमलेश राणा

चुपके से सुन इस दिल की धुन इस पल में जीवन सारा गाना बज रहा था धरा अपने ही ख्यालों में गुम बैठी हुई थी और साथ ही साथ गुनगुना भी रही थी। अतीत के पन्ने एक एक कर उसके सामने खुलते जा रहे थे। कैसे उसका जन्म हुआ, कितनी सुंदर थी वह उसके रूप … Read more

माफ करना तुम्हारी उम्मीद पर मैं खरा नहीं उतरा  – के कामेश्वरी 

अविनाश एक बहुत बड़े ऑर्गनाइज़ेशन के लीडर थे । उन्हें आए दिन टूर पर जाना पड़ता था ।इसलिएघर की सारी ज़िम्मेदारियों को पत्नी सुचित्रा ही सँभालती थी । उनके दो बच्चे थे ।मनोरमा और मनीषदोनों छोटे थे । मनीष तो तीन साल का ही था । अविनाश अपने कार्य कलापों में इतने व्यस्त रहते थेकि … Read more

उम्मीद परिवार के सदस्य से होती है –  कनार शर्मा 

सुबह का वक्त सुहाना के लिए बहुत ही मुश्किल होता क्यों??? क्योंकि चाय नाश्ते की तैयारी के साथ बच्चों और ऑफिस जाने वालों के टिफिन तैयार करने होते हैं। कहने को उसकी दो देवरानी और भी है मगर जब जेठानी सीधी सच्ची,सबकी उम्मीदें पूरी हो ऐसी सोच रखने वाली और परिवार को बांधने में यकीन … Read more

अपनों के बीच कैसी मेहमाननवाजी ? – भाविनी केतन उपाध्याय 

” क्या हुआ गरिमा ? उदास और विचलित क्यों है ? ” अपनी पत्नी को मायूस और उदास देखकर अमर ने कहा। ” आप ने देखा,जब से हम आए हैं शादी में शरीक होने पर एक भी बार भाभी या भैया ने हमारे बारे में कुछ नहीं पूछा और तो और आज सुबह का चाय … Read more

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