कुम्भ का डर……. – विनोद सिन्हा “सुदामा”
सुबह सुबह पत्नीश्री की चूड़ियों की खनखनाहट से मेरी नींद खुली…… आँख खोल देखा तो पत्नीश्री सज-धजकर मुस्कुराते हुए चाय की प्याली हाँथों म़े लिए खड़ी है..पहले पहल तो लगा कि मैं कोई स्वप्न देख रहा हूँ…. क्योंकि आदतन पत्नीश्री इतनी सुबह सुबह इस तरह तैयार नहीं दिखती… मैंने दो तीन बार जोर से आँखें … Read more