तुम आ गए हो…… विनोद सिन्हा “सुदामा”

कहते हैं जिंदगी और कुछ नहीं बस यादों का कारवाँ है.खट्टी मीठी भूली बिसरी यादों का कारवाँ…फिर चाहें यादें क्यूँ न हमारे भूले बिसरे दोस्तों की हो.. रिश्तेदारों की हो..हमारी हो…आपकी हो या किसी और की..यादें हर घड़ी हमारे इर्दगिर्द हमारे जेहन में मंडराती रहती हैं.. आज भी अच्छी तरह से याद है मुझे…. मैं … Read more

“बाहरी” – नीरजा नामदेव

अलीना को पढ़ना बहुत पसंद था ।जब भी समय मिलता है पत्रिकाएं पढ़ती। अब तो इंटरनेट पर भी उसे पढ़ने को बहुत सारी सामग्री मिल जाती थी। एक भी दिन ऐसा नहीं जाता जब वह पढ़े बिना रह पाती। आज ही उसने एक पत्रिका में कहानी पढ़ी शीर्षक था ‘आउटसाइडर’ जिसमें बेटा विदेश पढ़ने जाता … Read more

पति का सहारा पत्नी बन गई  – कनार शर्मा 

रोहन कुछ दिनों से बहुत परेशान था उसके सामने रखी चाय भी ठंडी हो गई… वर्षा ने रसोई से आकर देखा और बोली “अरे आपकी चाय पर तो पपड़ी जम गई है” आपने पी क्यों नहीं?? लाइए दोबारा गर्म कर लाती हूं कप उठाते हुए बोली!! दोबारा से चाय गरमकर उसके सामने रख कहने लगी … Read more

एक दूसरे का सहारा –   मुकुन्द लाल 

शाम के समय रजनी पार्क में अपनी बच्ची पुष्पा के साथ बेंच पर खोई-खोई सी बैठी हुई सोच रही थी कि एक स्त्री के जीवन में ऐसा भूचाल भी आ सकता है? उसने ऐसा कभी सोचा ही नहीं था कि उसका सुगंधित और हर्ष से सराबोर दाम्पत्य जीवन एक झटके में ही ध्वस्त हो जाएगा … Read more

अमूल्य सहारा – शुभ्रा बैनर्जी 

आज प्राची को दादा -दादी के आशीर्वाद की महिमा ज्ञात हुई।दोनों हांथ जोड़कर आसमान की ओर देखकर दिल से प्रणाम किया उसने दोनों को।बचपन से ही बहुत लाड़ली थी वो दोनों की।दादाजी की गोद में टंगकर कहां – कहां नहीं घूमी थी।चलना सीख जाने पर दादाजी की उंगली पकड़ कर हर जगह जाती थी वो,चाहे … Read more

बुरे वक्त में जब हमसफ़र का ही सहारा ना हो – सुल्ताना खातून

बात लगभग 13 महिने पुरानी है…. मेरी बेटी हाॅस्पिटलाइड थी (जो बेटी अब नहीं रही, वह जन्मजात हृदय रोगी थी)मैं और मेरे हसबैंड बहुत परेशान थे… बेटी उस समय 5  महीने की थी… उसके नाक… मुहँ…मे नल्कियां हाथो मे सुईयां…लगी थीं,मेरी बच्ची तकलीफ के इंतेहा पर थी… देखकर हमारा कलेजा फटता…हम जहनी और जिस्मानी तकलीफ़ … Read more

सहारे की बैसाखी – मंजू तिवारी

मम्मी ये ऐसे वैसे कपड़े नहीं पहनते हैं इनको तो ब्रांडेड कपड़े चाहिए मम्मी पापा भी बड़े खुश होकर अपनी बेटी के कहे अनुसार दमाद को बेटी को और उसके बच्चों को अच्छे अच्छे कपड़े दिलाते कभी पैसे देते बेटी जब भी आती एक गाड़ी भर कर सामान के साथ उसकी विदा की जाती,,, बेटी … Read more

एक दूसरे का सहारा…… – अनु अग्रवाल

वाह! दीनदयाल…पूरी कॉलोनी में तेरे परिवार के ही चर्चे रहते हैं….तीनों बहुओं पर तेरा पूरा नियंत्रण है…….आजकल कहाँ देखने को मिलते हैं संयुक्त परिवार…..बच्चे अपनी मनमामी करते हैं और हम बुड्ढे बुढ़ियों को पुराने फर्नीचर की तरह घर में पटक दिया जाता है……आज्ञा लेना तो दूर की बात….. बच्चे बताना भी जरूरी नहीं समझते लेकिन … Read more

हीटर –  उषा भारद्वाज

 हाड़ कंपाती हुई ठंड ,चाहे कितने भी गर्म कपड़े पहन लो लेकिन ठंड दूर नही हो रही थी।  मोहन को आज  फिर से लौटने में देर हो गई। जैसे ही वह घर के अंदर पहुंचा मां की आवाज सुनाई पड़ी- आ गया बेटा। ” हां मां”- मोहन के शब्दों में लाचारी और मजबूरी पूरी तरह … Read more

बस!माँ आपसे ही सीखा है। – ममता गुप्ता

“दीपू को उसकी नानी जाते वक्त चीज खाने के लिए पैसे देकर गई थी,उन्ही पैसो को दीपू अपनी गुल्लक में डाल रहा था तो उस वक़्त राधा वहाँ आई औऱ दीपू की गुल्लक देख कर कहने लगी-“”अरे मैं भी तो देखूं मेरे दीपू ने अपनी गुल्लक में कितने पैसे जोड़ रखे है। राधा अपने बेटे … Read more

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