हीटर –  उषा भारद्वाज

 हाड़ कंपाती हुई ठंड ,चाहे कितने भी गर्म कपड़े पहन लो लेकिन ठंड दूर नही हो रही थी।  मोहन को आज  फिर से लौटने में देर हो गई। जैसे ही वह घर के अंदर पहुंचा मां की आवाज सुनाई पड़ी- आ गया बेटा। ” हां मां”- मोहन के शब्दों में लाचारी और मजबूरी पूरी तरह … Read more

बस!माँ आपसे ही सीखा है। – ममता गुप्ता

“दीपू को उसकी नानी जाते वक्त चीज खाने के लिए पैसे देकर गई थी,उन्ही पैसो को दीपू अपनी गुल्लक में डाल रहा था तो उस वक़्त राधा वहाँ आई औऱ दीपू की गुल्लक देख कर कहने लगी-“”अरे मैं भी तो देखूं मेरे दीपू ने अपनी गुल्लक में कितने पैसे जोड़ रखे है। राधा अपने बेटे … Read more

“मैं तुम्हारी सासू मां हूं, मां नहीं” – अनिता गुप्ता

वह अपनी तकलीफ किसी को ना बताती । बचपन से ही मेघना की ऐसी ही आदत थी। मम्मी – पापा उसकी उतरी हुई शक्ल देखकर ही समझ जाते कि आज हमारी लाड़ली की तबियत ठीक नहीं है। या ऐसा भी कहा जा सकता है कि मेघना के बोलने के पहले ही पैरेंट्स उसकी तकलीफ समझ … Read more

डूबते का सहारा’ – अनीता चेची

कहते हैं बच्चे का मन कोरी स्लेट की तरह होता है जो लिखते हैं ,वहीं अंकित हो जाता है।   जब मैं पांचवी कक्षा में पढ़ती थी और महज 10 वर्ष की थी। उस समय हमारे घर में 6-7 भैंसे थी। उन मवेशियों को चराने के लिए हमें पहाड़ में  जाना पड़ता ।  गांव में … Read more

बेटियां हमारा अभिमान होती है –  ममता गुप्ता

रिया अपने माता पिता की इकलौती संतान थी। पिता मोहन व माता राधा अपनी बेटी की सभी ख्वाहिशों को पूरा करने की कोशिश करते थे,लेकिन पिता मोहन एक प्राइवेट स्कूल में चपरासी का काम करता था, औऱ माँ घर के कामकाज से फ्री होकर सिलाई का काम करती थी…!दोनों का एक ही सपना था कि … Read more

अन्न का सम्मान ही संस्कृति का मान है – नूतन योगेश सक्सेना 

“अरे वाह ये तिकोनी – तिकोनी बर्फी कितनी अच्छी है, और ये लड्डू…… ये लड्डू कितना मीठा है……. मां – मां देख पूरी भी हैं नरम – नरम इस थाल में और और ये बीच में क्या रखा है, मां देख ना क्या कहते हैं इसे…… हां याद आया पन्द्रह नंबर फ्लैट वाली मेमसाब जबरदस्ती … Read more

सहारा – अंतरा

आज खिचड़ी का दिन है.. रमिया ने मिट्टी के चूल्हे पर खिचड़ी का पतीला चढ़ाया तो बरबस ही मन अतीत की गलियों में घूमने लगा।  बंसी को भी खिचड़ी बेहद पसंद थी । खिचड़ी के दिन तो जैसे उसकी मन मांगी मुराद पूरी हो जाती थी। भले ही रमिया के पास खाने को फांके थे … Read more

हाथ की लकीरें – पिंकी सिंघल

अच्छे ग्रेड में एम बी ए करने के बावजूद भी अभी तक बेरोजगार घूम रहे कैफे में बैठे सम्राट ने जैसे ही अपना लैपटॉप खोला नोटिफिकेशन में मेल खुलते ही उसकी आंखें खुली की खुली रह गई।पिछले 3 वर्षों से नौकरी की तलाश में भटकते सम्राट की आज भगवान ने आखिर सुन ही ली यूएसए … Read more

मुंहबोला(सहारा एक राखी के रिश्ते का) – तृप्ति शर्मा

 यही तो मेरी सब कुछ है, मम्मी जब पवन को छोटी रुही को चॉकलेट खिलाते देख ,मम्मी डाटती तो पवन गंभीर चेहरा लेकर बोलता ।उसका ऐसा चेहरा देखकर मम्मी की दिल में हूक सी उठती और वह बात बदलते हुए कहती ,अच्छा चल रसोई में आकर मुझे अपनी जैसी बघारी हुई चटनी बनाना सिखा।      सबको … Read more

सहारा – अंजू निगम

   “माई अब इत्ते में गुजर नहीं होती। आप कोई और देख लो काम करने के लिए।”रमेशी ने जब ऐसा बोला तो अम्मा को विश्वास न हुआ।   छुटपन से अंम्मा ही पाले थी इस रमेशी को।उसकी माई तो जनम देते बखत ही परलोक जा बसी थी।बस गनीमत इत्ती रही कि उसके बाऊ ने दूसरा ब्याह न … Read more

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