ईश्वर की मदद – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

पून्नो  सूखी  लकड़ियाँ चुनते-चुनते जंगल में कितनी दूर निकल आई , उसे इस बात का अहसास तब हुआ जब पतली सी पगडंडी किसी दूसरी दिशा में मुड़ गई । चारों तरफ़ सन्नाटा, ऐसा लगा कि सूरज की किरणों की प्रचंडता से घबराकर जीव-जंतु तो क्या , पेड़-पौधों की परछाई भी छिप गई है ।  एक … Read more

आपसी समझ – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

गीतिका का पहला करवा चौथ था ।एक महीना पहले ही उसने मन ही मन तैयारी शुरू कर दी पर उसकी ससुराल में कोई हलचल नहीं थी । एक दिन ऑफिस में गीतिका की सहेली गुंजन ने कहा- गीतिका, करवा चौथ के लिए क्या ड्रेस तैयार करवा रही हो ? मैंने तो एक जॉरजेट का बड़ा … Read more

मेरी लक्ष्मीबाई – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

वनिता , अपनी बेटी के तौर तरीक़ों पर ज़रा ध्यान दो । वनिता की सास कांता देवी अपनी कर्कश आवाज़ में बोली । क्या हुआ ? माँ जी – वनिता कुछ सहमी सी बोली । क्या तुम्हें कुछ नहीं दिखता कि बेटी सयानी हो गई है । ये छोटे-छोटे कपड़े, बच्चों की तरह उछल-कूद, पूरा … Read more

अभागन – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

अम्मा ! कितनी देर में आई हो , गाय को रोटी देने गई थी आप। भाभी भी इंतज़ार करते-करते थक  कर सो गई । हाँ.. वो रास्ते में उषा की दादी मिल गई थी , तुझे तो उषा से मिले कई साल हो गए होंगे ? उ..षा…. सच्ची अम्मा, उषा तो कई सालों से दिमाग़ … Read more

विश्वास की डोर – करुणा मलिक   : Moral Stories in Hindi

रुक्मिणी  अनमनी सी बैठी सब्ज़ी काट रही थी । चालीस साल हो गए विवाह को पर न तो दोनों पति- पत्नी के विचार मिलते थे न पसंद- नापसंद और न ही घरेलू वातावरण ।  “ अक़्ल नाम की चीज नहीं औरत में , परदे लगाकर पूरे घर में अंधेरा कर दिया । प्रकाश कहाँ से … Read more

ग्लानि – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

चाची….. कुछ सुनाई नहीं दे रहा… ज़ोर से बोलिए…. घर में सब ठीक है ना….. ओह … यहाँ बहुत शोरगुल है…. चाची … रूकिए ज़रा, मैं ऊपर कमरे में जाती हूँ…..  हाँ चाची….. अब बोलिए…. सब ठीक है ना? यहाँ सब रिश्तेदार, पड़ोसी आदि आए हैं…. असल में…. बिट्टू भैया का यही पास के  कस्बे … Read more

बेटी अब से ससुराल ही तेरा घर है – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

जिस दिन पूर्वी का जन्म हुआ उस दिन परदादा महेंद्र प्रताप सिंह जी ने पूरे गाँव में लड्डू बँटवाए ।उनके  ना तो कोई बुआ थी ना बहन और ना ही बेटी । तीनों बेटों के भी बेटे ही बेटे ।  महेंद्र प्रताप सिंह  अपने समय के जाने- माने ज़मींदार थे । आस-पास के गाँवों में … Read more

सुकून – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

हाँ शांति….. मैं बोल रहा हूँ जयभगवान , घर में सब ठीक है ना? बापूजी कैसे हैं …..  हाँ जी…. सब ठीक है यहाँ…. आप कैसे हैं ? अब तो बस एक महीने की बात रह गई ……कब से इंतज़ार कर रहे हैं हम सब ….आख़िर रिटायरमेंट के दिन आ ही गए । बापू जी … Read more

बेनाम रिश्ते – करुणा मलिक: Moral Stories in Hindi

कहाँ हो यजमान …… कित्ती देर  से दरवाज़ा खटखटा रही हूँ…कहाँ गए सब ? ए….. मालती …. अपनी माँ और दादी को तो बुला दे   बेटा । मालती ने आवाज़ सुनी और कमरे में लेटी अपनी माँ से कहा—-मम्मी…. वो बाहमणी दादी …आ गई । जब देखो … मुँह उठा कर चली आती है … Read more

ये क्या अनर्थ कर दिया -करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

हैलो मम्मी… कैसी हो, कुछ काम कर रही थी क्या …. बहुत देर बाद फ़ोन उठाया । हूँ… हूँ…. दाँत में दर्द है …. फिर फ़ोन करूँगी…. रख दे । माँ के फ़ोन रखते ही मानसी सोचने लगी, दाँत में दर्द….. हो सकता है पर आज दाँत का दर्द…. केवल बहाना  लग रहा है….. शायद … Read more

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