रस और सच का पेड़ – डॉ मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

एक शाम, पुराने आम के पेड़ की छाया में नाना पंडित जगन्नाथ शर्मा अपनी दो नातिनों मनू और तनू के साथ लूडो खेल रहे हैं। सुनहरी धूप पत्तों से छनकर बिखर रही है।   तनू:(एक पासा फेंकते हुए) नाना, ये आम का पेड़ कितना पुराना है? इतने सारे फल लगते हैं!   मनू:(मुस्कुराते हुए) हाँ नाना! पर … Read more

गँवई ज्ञान – डॉ मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

सूरज ढलने को था। आम के बगीचे की छाँव में, धूल भरी गलियों से उठती गरमाहट कुछ कम हुई थी। मैं, एक शहरी लेखक, पुराने कुएँ के पास चबूतरे पर बैठा, कॉपी पर कुछ ठीक कर रहा था। तभी आवाज़ आई: “साब! ये कागज-कलम लेके क्या खोजते रहते हो? ज़मीन में गड़ा मिलता है क्या?” … Read more

बंटवारा

“मां, हम दोनों देवरानी-जेठानी का काम बांट दीजिए, वरना मैं अकेले कब तक करती रहूंगी। मेरे भी छोटे-छोटे बच्चे हैं। अभी तक अकेली थी तो पूरे घर का काम अकेली ही करती रही हूं।” मीना कितने सालों से इंतजार कर रही थी कि देवरानी आएगी तो थोड़ा सा काम तो बटेगा। “आपने कहा भी था … Read more

दीवार – खुशी : Moral Stories in Hindi

नमिता जी दो बेटों नितिन और निलेश की मां थी एक बेटी आराधना जिसकी शादी की जिम्मेदारी से वो मुक्त हो चुकी थी।पति राजेश जी नाक की सीध में चलने वाले व्यक्ति थे।सुबह दफ्तर और दफ्तर से घर यार दोस्त भी नाम मात्र के थे।इसलिए पूरा निजाम नमिता के पास था।नितिन मल्टीनेशनल कंपनी में काम … Read more

“खुशी मिली इतनी की मन में ना समाये – सुनीता मौर्या “सुप्रिया” :

Moral Stories in Hindi “मम्मी…मम्मी…मम्मी जीईईई…कहां हो आप?” दस साल का पल्लव खुशी से अपनी मां को पुकारता हुआ घर मे दाखिल हुआ।   हाथ में सूखे कपड़ों का ढेर लिये  सीढियों से उतरती मैथली झुंझलाते हुए पूछती है,”क्या हुआ जो इतना बेसब्रा हुआ जा रहा है, छत पर गई थी सूखे कपड़े उठाने?” पल्लव हाथ … Read more

अनकही गंध – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

सुबह का सूरज अभी आँखें मल ही रहा था। हवा में कसैली सर्दी और डीजल इंजनों की तीखी गंध घुली हुई थी। छोटे से शहर के स्टेशन पर, प्लेटफॉर्म नंबर दो के पास, करमचंद का चाय का ठेला जैसे सिसकती हुई दुनिया में एक ऊष्मा का केंद्र था। उसके बर्तनों से निकलती भाप, जीवन की … Read more

 तरक्की – पुष्पा कुमारी ‘पुष्प’ : Moral Stories in Hindi

“मोहित बेटा! तुम अमेरिका से वापस कब लौटे?” अचानक एक जानी पहचानी आवाज सुनकर घर के बाहर खड़े अपने स्कूटर की सफाई कर रहे मोहित का ध्यान भंग हुआ… “अरे अंकल आप! नमस्ते अंकल! बहुत दिनों बाद इधर आना हुआ आपका!” किराया देकर अभी-अभी ऑटो से नीचे उतरे जगदीश्वर जी को देखते ही मोहित ने … Read more

“एक बूंद ओस की” – सुधा जैन : Moral Stories in Hindi

24 वर्षीय अनन्या संगीत स्कूल में प्राध्यापिका है ।सहज ,सुंदर सरल अनन्या अपने पापा की बहुत चहेती रही है ।बचपन से लेकर बड़े होने तक पापा, पापा करती रही ।सभी उसे पापा की परी के नाम से जानते है । बहुत लाडली थी पापा की। पापा संगीत स्कूल में अध्यापक थे। संगीत के प्रति समर्पित … Read more

मन की पीड़ा – उषा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

जीवन को विकास की गतिशीलता ही उसे जीवन्त बनाती है ,जिस दिन यह गति रुक जाये समझो उल्टी गिनती शुरू।व्यक्ति के जीवन की सबसे कठिन अवस्था होती है वृद्धावस्था जो उसेअपने साथ ही लेकर जाती है ,छोड़ती नहीं । इससमय शरीर की सारी इन्द्रियां शिथिल होकर शक्तिहीन होने लगती हैं ‌कभी बचपन में सुना था … Read more

जब मानवता बोल उठी। – ज्योति आहूजा

अप्रैल 2021 — कोरोना की दूसरी लहर पूरे देश में कहर बरपा रही थी। अस्पतालों में लंबी कतारें, ऑक्सीजन की कमी, और हर घर में चिंता का माहौल था। इन्हीं दिनों संध्या की तबीयत अचानक बिगड़ गई। तेज़ बुखार और साँस की दिक्कत ने  संध्या के पति अमित और पूरे परिवार को घबरा दिया। कोरोना … Read more

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