**वृद्धाश्रम के द्वार से वापसी और पिता का मौन त्याग** – सविता गर्ग

*बेटे ने पिता को बोझ समझकर वृद्धाश्रम की चौखट पर छोड़ना चाहा, लेकिन पिता की जेब से निकली एक चिट्ठी ने बेटे के जमीर को ऐसा झकझोरा कि वो सारी दुनिया से लड़ गया। जानिये आखिर क्या लिखा था उस ख़त में जिसने एक टूटते परिवार को फिर से जोड़ दिया?* “ये कौन सी जगह … Read more

वो अधूरी चिट्ठी और 30 साल का बोझ – सावित्री मल्होत्रा

शादी के मंडप से भागा हुआ दूल्हा जब 30 साल बाद अचानक सामने आया, तो उस बुजुर्ग महिला का खून खौल उठा। लेकिन जब उस भगोड़े ने अपनी जेब से वो पीला पड़ा हुआ कागज़ निकाला, तो नफरत आंसुओं में बह गई। पढ़िए एक ऐसे त्याग की कहानी जो दुनिया की नज़रों में ‘धोखा’ थी। … Read more

**सूनी कोख और भरा हुआ आँचल** – महक दुआ

*उसने अपनी कोख इसलिए सूनी रखी ताकि देवर को ‘सतेला’ होने का अहसास न हो। लेकिन बीस साल बाद जब उसी देवर ने भरी महफिल में कहा, “तुम हो कौन? सिर्फ मेरी भाभी ही तो हो,” तो उस त्याग की मूरत के दिल के इतने टुकड़े हुए कि आवाज़ भी नहीं निकली।* — वंदना जब … Read more

पहला प्रेम पत्र – एम. पी. सिंह

बात बहुत पुरानी हैं लेकिन यादें एकदम ताज़ा. ये बात हैं जब में कॉलेज के तीसरे साल में था. एक दिन मैंने लाइब्रेरी से एक रेफरेंस बुक इशू करवाई, तभी एक खूबसूरत सी लड़की सरिता मेरे पास आकर बोली, मुझे ये बुक चाहिए, मुझे कल ऐसाइनमेंट जमा करना हैं, बोलते हुए उसके चेहरे पर कोई … Read more

कांच की चूड़ियाँ – डॉ उर्मिला सिन्हा

“क्यों केशव?” मृणालिनी ने केशव की तरफ देखे बिना पूछा। “उस दिन तुम क्यों नहीं आए थे? हम भागकर शादी करने वाले थे न? मैं स्टेशन पर दुल्हन के जोड़े में तुम्हारा इंतज़ार करती रही। पूरी रात… और तुम? तुम गायब हो गए। बाद में पता चला कि तुमने अपने पिता के दोस्त की बेटी … Read more

पिता का वनवास – मुकेश पटेल 

ट्रेन की रफ़्तार के साथ-साथ सुमन के दिल की धड़कनें भी बढ़ती जा रही थीं। खिड़की से बाहर भागते हुए पेड़ और खेत उसे अपने बचपन की याद दिला रहे थे। पूरे तीन साल बाद वह अपने मायके, अपने शहर लखनऊ वापस आ रही थी। गोद में छह महीने का बेटा ‘आरव’ सो रहा था … Read more

स्वाभिमान का कन्यादान  – गरिमा चौधरी 

*शादी के मंडप में जब लड़की के पिता ने कांपते हाथों से शगुन का लिफाफा बढ़ाया, तो लड़के की माँ ने उसे ठुकरा दिया। सन्नाटा छा गया। सबने सोचा मांग बड़ी है, पर उस माँ ने जो किया, उसने बारातियों की आँखों में पानी ला दिया। क्या एक ‘बेटे वाली’ सच में ‘बेटी वाले’ का … Read more

अंतिम प्रार्थना – रीमा साहू

*क्या प्रेम का मतलब सिर्फ थामे रखना है या कभी-कभी मुक्त कर देना ही सबसे बड़ा प्रेम है? पढ़िए एक ऐसी पत्नी की दास्तां जिसने अपने पति के लिए वो दुआ मांगी जिसे मांगने में रूह कांप जाती है।* आज शाम को भी ऐसा ही हुआ था। विनोद अचानक हिंसक हो गए थे। उन्होंने अपने … Read more

कांच के महल – विनीता खन्ना 

ससुर ने दामाद की फटी जेब देखकर उसे भरी महफ़िल में ‘बेचारा’ कह दिया, लेकिन उसे नहीं पता था कि वक्त का पहिया जब घूमता है, तो वो राजा को रंक और रंक को राजा बना देता है। क्या स्वाभिमान की जीत दौलत के अहंकार को हरा पाएगी? रवि ने अपनी पुरानी स्कूटर को तीसरी … Read more

दिल के रिश्ते: एक मां का फैसला – गीता गुप्ता

*जब बेटी ने पिता की चिता की राख ठंडी होने से पहले ही जायदाद का बंटवारा मांग लिया, तब एक मां ने जाना कि कोख से जन्म देने से कोई अपना नहीं होता। पढ़िए एक ऐसी मां की कहानी जिसने समाज के डर से नहीं, बल्कि अपने स्वाभिमान के लिए एक कठोर फैसला लिया।* — … Read more

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