खोखली दीवारें – रश्मि प्रकाश 

कहीं बहु ने ससुराल की बातें अपने मायके में जग-जाहिर कर दी तो?? रसोई के दरवाजे की ओट में खड़ी सुलोचना देवी की सांसें जैसे गले में ही अटक गई थीं। उनकी बहू, आकृति, फोन पर अपनी माँ से बात कर रही थी। आवाज़ धीमी थी, लेकिन सुलोचना देवी के कान चौकन्ने थे। “हाँ माँ… … Read more

बेटा हो तो ऐसा – लतिका श्रीवास्तव 

जब दोनों बड़े बेटों के बाद सबसे छोटे बेटे ने भी माता पिता से अलग होने का फैसला ले लिया.. शाम की आरती का वक़्त हो चला था, लेकिन ‘रघुनाथ विला’ के बड़े से हॉल में अगरबत्ती की खुशबू के बजाय एक भारी मनहूसियत तैर रही थी। दीवार घड़ी की टिक-टिक हथौड़े जैसी लग रही … Read more

 नालायक औलाद – करुणा मलिक 

जब अपनी औलाद ही नालायक निकल जाए तो पराए घर से आई बहु का क्या कसूर..  दिवाकर बाबू अपनी पुरानी आरामकुर्सी पर बैठे थे, लेकिन आराम उनके नसीब में कहाँ था? उनकी नज़रें बार-बार दीवार पर लटकी उस घड़ी पर जा रही थीं, जिसकी टिकटिक घर के सन्नाटे को और गहरा बना रही थी। रसोई … Read more

“यह घर मेरा भी है | एक बहू की आत्मसम्मान की कहानी” – डॉ पारुल अग्रवाल 

जब जेठानी ने देवरानी की गैर मौजूदगी में.. उसके कमरे पर कब्जा कर लिया |  ऑटो रिक्शा की आवाज़ के साथ ही सुमेधा ने चैन की साँस ली। पिछले एक महीने से वह अपने मायके में थी, जहाँ उसकी माँ की बाईपास सर्जरी हुई थी। अस्पताल के चक्कर, रातों का जगना और घर की ज़िम्मेदारी—इन … Read more

बहु तुम्हारी ननद ही तो ले गई है तुम्हारी साड़ी, कोई गैर नहीं.. – निभा राजीव

बहु तुम्हारी ननद ही तो ले गई है तुम्हारी साड़ी, कोई गैर नहीं.. कमरे में फैली मिट्टी की सोंधी खुशबू और फैब्रिक कलर्स की महक रोली के लिए किसी इत्र से कम नहीं थी। वह पिछले पंद्रह दिनों से तसर सिल्क की उस साड़ी पर बारीक मधुबनी पेंटिंग कर रही थी। यह केवल एक साड़ी … Read more

“एक ही घर में दो नियम क्यों?” – संगीता अग्रवाल

दोपहर के तीन बजे थे। अनन्या अभी-अभी अपना लैपटॉप बंद करके उठी ही थी कि डोरबेल बजी। उसने घड़ी देखी और एक गहरी साँस ली। वह जानती थी कि इस समय कौन हो सकता है। यह समय उसकी सासू माँ, निर्मला जी की बचपन की सहेली और कॉलोनी की ‘खबर-नवीश’ सरला चाची के आने का … Read more

मायका पराया ससुराल अपना – करुणा मलिक

कार की खिड़की से पीछे छूटते पेड़ों को देखते हुए अवनि की आँखों से बहने वाले आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। ड्राइवर सीट पर बैठे उसके पति, निशित ने एक बार भी उसे चुप कराने की कोशिश नहीं की। वह जानता था कि यह वो सैलाब है जिसे बह जाने देना ही … Read more

आप तो घर की नौकरानी हो चाची – स्वाती जैन

सौम्या , यह क्या तुम तो आराम से यहां बैठकर खाना खा रही हो , रात में मेरे बेटे अंशु ने गाजर का हलवा बनाने कहा था , तुमने अभी तक हलवा नहीं बनाया ! जेठानी रीटा अपनी देवरानी सौम्या से बोली ! सौम्या घबराहट से बोली – बस दीदी , अभी बना देती हुं … Read more

भजन संध्या बनाम किटी पार्टी – शुभ्रा बैनर्जी 

महिमा की अनुशासन प्रियता व चुगली ना करने की आदत का परिणाम ही था कि,अधिकतर महिलाओं के सामूहिक आयोजनों में उसे बुलाया नहीं जाता था। ऊपर से स्पष्ट वादी शिक्षिका की साफ- सुथरी छवि का कवच भी था महिमा के साथ। अक्सर मोहल्ले की तथाकथित सहेलियां पिकनिक पर जाती रहती थीं,और महिमा को बाद में … Read more

अनाधिकार निर्णय – शुभ्रा बैनर्जी

“संजना ओ संजना,आज इतनी देर तक सोई हो,तबीयत खराब है क्या?बच्चों को स्कूल नहीं भेजना क्या?”  सोम की आवाज सुनकर ,संजना हड़बड़ाकर उठी।जैसे ही घड़ी की तरफ देखा, दंग रह गई।आज इतनी देर कैसे सोई ?तभी भोर का सपना आंखों के आगे नाच गया।छोटी बुआ किसी  तकलीफ में है क्या? कब से सोच रही हूं, … Read more

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