वजूद की तलाश
“कहते हैं बुढ़ापे में इंसान को सिर्फ आराम चाहिए होता है, लेकिन जब आराम की कीमत आपका आत्मसम्मान हो, तो मखमल का बिस्तर भी कांटों जैसा चुभने लगता है। क्या एक माँ अपने ही बनाए घोंसले में सिर्फ एक ‘फालतू सामान’ बनकर रह सकती है, जिसे हर कोई अपनी सहूलियत के हिसाब से इस्तेमाल करे?” … Read more