ये औरतें भी न, छोटी-छोटी बातों को दिल पर लगा लेती हैं। – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव

रात के ग्यारह बज चुके थे। मुंबई की उस गगनचुंबी इमारत के चौदहवें फ्लोर पर बने फ्लैट की बत्तियाँ बुझ चुकी थीं, सिवाय ड्राइंग रूम के एक कोने में जलते लैम्प के। सोफे पर पसरकर ३२ वर्षीय विहान अपने लैपटॉप में सिर गड़ाए हुए था। किचन से बर्तनों के खटकने की हल्की आवाज़ें आ रही … Read more

असली जेवर तो इंसान के संस्कार होते हैं। – रश्मि प्रकाश 

उदयपुर के भव्य ‘द लीला पैलेस’ होटल को दुल्हन की तरह सजाया गया था। यह सिर्फ एक शादी नहीं थी, बल्कि शहर के दो सबसे प्रतिष्ठित व्यापारिक घरानों—सिंघानिया और खन्ना परिवार—का मिलन था। हर तरफ विदेशी फूलों की सजावट, झूमते हुए क्रिस्टल शैंडलियर और शहनाई की गूंज थी। मेहमानों की लिस्ट में शहर के मेयर … Read more

ससुराल में भी कोई अपना होता है – संगीता अग्रवाल 

शाम के सात बज रहे थे, और बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी। बारिश की बूंदें खिड़की के कांच पर ठीक वैसे ही टकरा रही थीं जैसे नैना के दिल पर डर की दस्तक हो रही थी। वह अपने बेडरूम के कोने में, अलमारी के पास ज़मीन पर बैठी थी। उसके हाथ में एक मखमली … Read more

आप मेरी माँ जैसी हैं – कविया गोयल

बेंत की आराम कुर्सी पर बैठी 65 वर्षीय सुलोचना देवी की नजरें सामने दीवार पर टंगी एक पुरानी तस्वीर पर जमी थीं। तस्वीर धुंधली पड़ चुकी थी, ठीक वैसे ही जैसे उनकी यादों में अब वो पुराना, भरा-पूरा घर धुंधला हो गया था। बाहर तेज बारिश हो रही थी। खिड़की के कांच से टकराती बूंदें … Read more

सिर्फ़ रिटायर हुईं हूँ फ्री नहीं हुईं हूँ – स्वाति जैन

सावित्री देवी ने अपने सूटकेस की आखिरी चेन बंद की और कमरे के चारों ओर एक संतोषजनक नज़र डाली। आज पैंतीस साल की लंबी और बेदाग़ नौकरी के बाद, वे ‘प्रिंसिपल सावित्री देवी’ के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं। मेज पर रखे गुलदस्ते और विदाई समारोह में मिली शॉल उन्हें बार-बार यह अहसास दिला रहे … Read more

यह लड़की मेरे बुढ़ापे का सहारा नहीं, जंजाल बन गई है – आरती झा

शाम के साढ़े सात बज रहे थे। अपार्टमेंट की लिफ्ट से बाहर निकलते ही आर्यन को अपने फ्लैट के दरवाजे से आती हुई ऊँची आवाजें सुनाई देने लगीं। उसके कदमों की रफ्तार, जो दिन भर की थकान के कारण धीमी थी, अचानक तेज हो गई। यह कोई नई बात नहीं थी, लेकिन आज आवाज़ में … Read more

पाप और पुण्य – गरिमा चौधरी

बनारस के घाटों से थोड़ी दूर, एक पुरानी लेकिन बेहद भव्य हवेली ‘संस्कार भवन’ में आज सुबह से ही गहमागहमी थी। हवेली के मुखिया, पंडित दीनानाथ शास्त्री, शहर के माने हुए विद्वान और धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाले व्यक्ति थे। आज का दिन उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण था। उनके दिवंगत पिता की 50वीं पुण्यतिथि थी … Read more

अपमान जब अपनों से मिलता है, तो आँसू सूख जाते हैं – मुकेश पटेल

आज ‘गृह-प्रवेश’ की पूजा थी। घर मेहमानों से भरा था। हर कोई विनय और उसकी पत्नी शिखा की किस्मत की तारीफ कर रहा था। “क्या घर बनाया है विनय! बिल्कुल महल जैसा है,” विनय के बॉस ने व्हिस्की का गिलास थामते हुए कहा। विनय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। “थैंक यू सर। बस, … Read more

बहू हम इस घर के नौकर नहीं मालिक हैं – मुकेश पटेल 

जब घर में आई नई बहू ने अपने वृद्ध सास ससुर को घर से निकालने और अपनी चलाने के लिए रची साजिश तो वृद्ध सास ससुर ने चली ऐसी चाल कि बहू की रूह कांप गई. “उफ्फ! मम्मी जी,” शालिनी ने नाक सिकोड़ते हुए कहा, “मैंने आपसे कितनी बार कहा है कि अपनी ये आयुर्वेदिक … Read more

अपमान का घूंट – हेमलता गुप्ता 

अरे जब बाप ही ऐसा हो, तो बेटी तो ऐसी होगी ही ना, ससुर जी जरा सख्त होते हुए बोले… पहली बार ससुराल आए पिता की बेज्जती होते देख, बेटी ने सास ससुर को सिखाया ऐसा सबक कि उनके होश उड़ गए…. शहर के सबसे पॉश इलाके ‘सिविल लाइन्स’ में स्थित मल्होत्रा मेंशन आज रोशनी … Read more

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