“आज तक कौन सा सुख पाया मेरी बेटी ने…”
“आज तक कौन सा सुख पाया मेरी बेटी ने… अपने बाबुल के घर में… जो उसे यहां की याद आएगी… क्यों आएगी…!” यह कहते हुए रविंद्र जी ने एक लंबी, ठंडी आह भरी और धीरे-धीरे बिस्तर पर लेट गए। उनकी आंखें छत पर टिकी थीं, लेकिन मन अतीत की गलियों में भटक रहा था। मन … Read more