आप तो घर की नौकरानी हो चाची – स्वाती जैन

सौम्या , यह क्या तुम तो आराम से यहां बैठकर खाना खा रही हो , रात में मेरे बेटे अंशु ने गाजर का हलवा बनाने कहा था , तुमने अभी तक हलवा नहीं बनाया ! जेठानी रीटा अपनी देवरानी सौम्या से बोली ! सौम्या घबराहट से बोली – बस दीदी , अभी बना देती हुं … Read more

भजन संध्या बनाम किटी पार्टी – शुभ्रा बैनर्जी 

महिमा की अनुशासन प्रियता व चुगली ना करने की आदत का परिणाम ही था कि,अधिकतर महिलाओं के सामूहिक आयोजनों में उसे बुलाया नहीं जाता था। ऊपर से स्पष्ट वादी शिक्षिका की साफ- सुथरी छवि का कवच भी था महिमा के साथ। अक्सर मोहल्ले की तथाकथित सहेलियां पिकनिक पर जाती रहती थीं,और महिमा को बाद में … Read more

अनाधिकार निर्णय – शुभ्रा बैनर्जी

“संजना ओ संजना,आज इतनी देर तक सोई हो,तबीयत खराब है क्या?बच्चों को स्कूल नहीं भेजना क्या?”  सोम की आवाज सुनकर ,संजना हड़बड़ाकर उठी।जैसे ही घड़ी की तरफ देखा, दंग रह गई।आज इतनी देर कैसे सोई ?तभी भोर का सपना आंखों के आगे नाच गया।छोटी बुआ किसी  तकलीफ में है क्या? कब से सोच रही हूं, … Read more

विरासत खून से नहीं, संस्कारों से मिलती है – रोनिता कुंडु

“अब एक पल भी… बस एक पल भी मैं इस गँवार और सुस्त औरत के साथ नहीं रह  सकता! मेरा स्टैंडर्ड, मेरी रेप्युटेशन, सब मिट्टी में मिला दिया है इसने!” विक्रम की दहाड़ से पूरे बंगले की दीवारें जैसे कांप उठी थीं। लिविंग रूम के बीचों-बीच इटैलियन मार्बल के फर्श पर एक टूटी हुई एंटीक … Read more

खुशी के आँसू – आरती शुक्ला

कमरे में सन्नाटा था, लेकिन सावित्री के मन में शोर गूंज रहा था। आज उसके जीवन का सबसे बड़ा दिन था, और विडंबना देखिए, यही दिन उसके जीवन का सबसे भारी दिन भी साबित हो रहा था। सामने टीवी पर समाचार चल रहा था, जिसमें एक युवा पुलिस अधिकारी को राष्ट्रपति द्वारा वीरता पुरस्कार से … Read more

नया घर – संगीता अग्रवाल 

बारिश की बूंदें कार के शीशे पर लगातार टकरा रही थीं, मानो बाहर का मौसम गाड़ी के भीतर बैठे हरिशंकर बाबू के मन में चल रहे तूफ़ान को भांप गया हो। कार की पिछली सीट पर बैठे सत्तर वर्षीय हरिशंकर अपनी गोद में रखे पुराने ब्रीफकेस को कसकर पकड़े हुए थे। उस ब्रीफकेस में न … Read more

पिता का स्वाभिमान – शुभ्रा बनर्जी

दीवार पर टंगे कैलेंडर की तारीखें जैसे पंख लगाकर उड़ रही थीं। वंदना के लिए यह सफर सिर्फ़ एक शादी में शामिल होने का नहीं था, बल्कि अपनी ममता के एक हिस्से को विदा करने का था। वह अपनी ननद, सुनिधि, की इकलौती बेटी प्रिया की शादी में शामिल होने के लिए इंदौर पहुंची थी। … Read more

गृहस्थी – हेमलता गुप्ता

“मीरा, कल सुबह से तुम और सुमित अपनी रसोई अलग कर लोगे। ऊपर वाले फ्लोर पर छोटा किचन बना हुआ है, गैस और बर्तन मैंने रखवा दिए हैं। राशन का सामान कल सुमित ले आएगा। अब से तुम दोनों का खाना-पीना वहीं होगा।” सावित्री देवी ने अपनी नई-नवेली बहू मीरा से यह बात इतने सपाट … Read more

खामोशी की गूंज – हेमलता गुप्ता

सुबह के 6:30 बज रहे थे। अलार्म की आवाज़ से नहीं, बल्कि रसोई में बर्तनों के पटकने की तेज़ आवाज़ से 65 वर्षीय सुमेधा देवी की आँख खुली। उनके सिर में हल्का भारीपन था। कल रात ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ था, इसलिए नींद देर से आई थी। अभी उन्होंने करवट बदली ही थी कि … Read more

कड़वाहट –  शुभ्रा बनर्जी

मुंबई के एक पॉश बैंक्वेट हॉल में झूमर की रोशनी और शहनाई की धुन के बीच मेहमानों का तांता लगा हुआ था। अवसर था ‘आरव’ का अन्नप्राशन संस्कार। आरव, जो शिखा और मयंक का पहला बेटा था, आज मखमल की शेरवानी में किसी राजकुमार से कम नहीं लग रहा था। मीरा अपने पति, आकाश, के … Read more

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