नहीं आऊँगी – सतीश मापतपुरी

मैं जब कभी बरामदे में बैठता हूँ , अनायास मेरी निगाहें उस दरवाजे पर जा टिकती है, जिससे कभी शालू निकलती थी और यह कहते हुए मेरे गले लग जाती थी – ” अंकल, आप बहुत अच्छे हैं. कई साल गुजर गए उस मनहूस घटना को बीते हुए. वक़्त ने उस घटना को अतीत का … Read more

मैंने इसमें प्यार मिलाया है – बीना शर्मा

आज संध्या की तबीयत बेहद खराब थी सुबह से ही उसे खांसी जुखाम और बुखार हो रहा था जिसकी वजह से उसका बिस्तर से उठने को बिल्कुल भी मन नहीं था इसलिए वह मुंह ढक के रजाई ओढ़ के लेट गई थी आंख बंद करके लेटने के बाद भी उसे नींद नहीं आ रही थी … Read more

अब कभी किसी से सासू मां की बुराई ना सुनूंगी – मधु वशिष्ठ

भावना जी जितनी सर्वगुण संपन्न थीं, लगभग उसी अनुपात में उनकी बहू भी थी। हालांकि कॉलोनी में सभी का ख्याल था कि भावना जी के तेज़-तर्रार स्वभाव के रहते किसी भी बहू का टिकना नामुमकिन ही है। सोने पर सुहागा यह कि वह सर्वगुण संपन्न भी थीं। सिलाई, कढ़ाई, बुनाई या घर का काम हो, … Read more

बहु की पसंद – सविता गोयल

” मम्मी जी, आज इतनी सारी गाजरें क्यों मंगवाई हैं?,, “अरे बहु, निशा और नितिन दोनों को ही गाजर का हलवा बहुत पसंद है। सर्दियां शुरू होती नहीं की इनकी फरमाइश शुरू हो जाती है।,,  गाजर का हलवा तो माधवी को भी बहुत पसंद था लेकिन वो संकोचवश अपनी सासु मां पार्वती जी से बोल … Read more

अपहरण का बदला – रवीन्द्र कान्त त्यागी

रात के दो बज रहे हैं। आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं है। मेरी पत्नी अनुष्का अपने तीन साल के वैवाहिक जीवन को ठोकर मार कर चली गई है। बरसों से मेरे हृदय में उसके लिए बसे अगाध प्रेम, समर्पण और विश्वास को एक तीन पंक्ति के कागज के पुर्जे से तार तार करके, मेरी … Read more

( ना ) जायज़ रिश्ते – रवीद्र कान्त त्यागी

गुड़गांव की आई.टी. सेक्टर की बड़ी कंपनी में शालीन और शैलजा काम करते थे. दिल्ली और एनसीआर में ही नहीं, सभी बड़े शहरों में और अब तो कस्बों और गांवों में भी अनेक प्रेम कहानियां रोज ही बनती और बिगड़ती रहती हैं. मैट्रो ट्रेन में, कैंटीन में, बस स्टॉप पर और ऑफिस में रोज ऐसी … Read more

कर्ज की बेदी – डॉ बीना कुण्डलिया

राधे मोहन जी परेशान से घर में चहलकदमी कर रहे। हफ्ते भर से उनका यही हाल आँखों से नींद गायब एक माह बाद बेटी की शादी तय हुई कपड़े गहने लतते पंडाल होटल सभी मिलाकर काफी खर्चा होने वाला कैसे होगा सब ? पैसा तो कम पड़ जायेगा । कर्ज तो लेना ही पड़ेगा । … Read more

कडवी जुबान – परमा दत्त झा

आज बृजेश मिश्र को श्रेष्ठ कलाकार के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सम्मान समारोह में उन्हें पांच लाख नकद राशि, एक स्वर्ण पदक सहित समान से सम्मानित किया गया है।उसके बाद खुशी से चहकता फोटो था। अब काटो तो खून नहीं -बिटटी सारा कुछ हड़पकर रानी बनी बैठी है और हम उनकी औलाद ठोकर … Read more

भाभी की बेटी तो फ्री की नौकरानी हैं !! – स्वाती जैंन

इस अनाथ को तू यहां अपने घर क्यों ले आई हैं , मेरे घर को अनाथाश्रम समझ के रखा हैं क्या ?? तेरे भाई की बेटी की इस घर में कोई जगह नहीं समझी , तेरे गरीब मायके वाले तुझे ही मुबारक , मैं कह देती हुं कि इसे जहां से लाई हैं , वहीं … Read more

जीवनसाथी – सविता गोयल

आज फिर मनोहर जी पार्क का चक्कर लगाकर वापस आ गए, लेकिन सुधाकर आज भी घूमने नहीं आया था। मन में बहुत से विचार उठने लगे, “पता नहीं तबीयत ठीक है या नहीं??” घर आकर भी उन्हें बेचैनी हो रही थी। उनकी पत्नी सरोज जी चाय लेकर आई तो उन्हें चिंता में देखकर पूछ बैठी … Read more

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