जज पिता का फैसला! – हेमलता गुप्ता

जब बूढ़े मां बाप की बेटी को बहू ने अपनी बर्थडे पार्टी में किया सबके सामने.. बेइज्जत.. तो माता पिता ने उठाया ऐसा कदम जिससे बेटे बहू की रूह कांप जाएगी  शहर के सबसे पॉश इलाके में स्थित ‘रॉयल ओक बैंक्वेट हॉल’ आज रोशनी से नहाया हुआ था। बाहर महंगी कारों की कतार लगी थी … Read more

अम्मा की अलमारी – प्रभा पारीक

बचपन से लेकर आज तक न जाने क्यों, अनेक बार खोल कर देख लेने के बावजूद भी हमारे लिए अम्मा की अलमारी  एक रहस्य ही रही|  कभी जब  भी  माँ  अलमारी  खोलकर साफ करने के लिए बैठती  तो  हम सबसे पहले आ धमकते, जबकि हमें कुछ चीजों का निश्चित रूप से पता ही होता था … Read more

तोहफ़ा – पुष्पा जोशी 

जब बेटे ने अपनी पहली तनख्वाह से अपनी मां को दिया सबसे बेहतरीन तोहफा.. मोबाइल की स्क्रीन पर मेसेज की बीप ने समीर का ध्यान अपनी ओर खींचा। “आपके खाते में 45,000 रुपये जमा कर दिए गए हैं – वेतन माह अगस्त।” समीर के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान तैर गई जिसे शब्दों में बयां … Read more

खोखली दीवारें – रश्मि प्रकाश 

कहीं बहु ने ससुराल की बातें अपने मायके में जग-जाहिर कर दी तो?? रसोई के दरवाजे की ओट में खड़ी सुलोचना देवी की सांसें जैसे गले में ही अटक गई थीं। उनकी बहू, आकृति, फोन पर अपनी माँ से बात कर रही थी। आवाज़ धीमी थी, लेकिन सुलोचना देवी के कान चौकन्ने थे। “हाँ माँ… … Read more

बेटा हो तो ऐसा – लतिका श्रीवास्तव 

जब दोनों बड़े बेटों के बाद सबसे छोटे बेटे ने भी माता पिता से अलग होने का फैसला ले लिया.. शाम की आरती का वक़्त हो चला था, लेकिन ‘रघुनाथ विला’ के बड़े से हॉल में अगरबत्ती की खुशबू के बजाय एक भारी मनहूसियत तैर रही थी। दीवार घड़ी की टिक-टिक हथौड़े जैसी लग रही … Read more

 नालायक औलाद – करुणा मलिक 

जब अपनी औलाद ही नालायक निकल जाए तो पराए घर से आई बहु का क्या कसूर..  दिवाकर बाबू अपनी पुरानी आरामकुर्सी पर बैठे थे, लेकिन आराम उनके नसीब में कहाँ था? उनकी नज़रें बार-बार दीवार पर लटकी उस घड़ी पर जा रही थीं, जिसकी टिकटिक घर के सन्नाटे को और गहरा बना रही थी। रसोई … Read more

“यह घर मेरा भी है | एक बहू की आत्मसम्मान की कहानी” – डॉ पारुल अग्रवाल 

जब जेठानी ने देवरानी की गैर मौजूदगी में.. उसके कमरे पर कब्जा कर लिया |  ऑटो रिक्शा की आवाज़ के साथ ही सुमेधा ने चैन की साँस ली। पिछले एक महीने से वह अपने मायके में थी, जहाँ उसकी माँ की बाईपास सर्जरी हुई थी। अस्पताल के चक्कर, रातों का जगना और घर की ज़िम्मेदारी—इन … Read more

बहु तुम्हारी ननद ही तो ले गई है तुम्हारी साड़ी, कोई गैर नहीं.. – निभा राजीव

बहु तुम्हारी ननद ही तो ले गई है तुम्हारी साड़ी, कोई गैर नहीं.. कमरे में फैली मिट्टी की सोंधी खुशबू और फैब्रिक कलर्स की महक रोली के लिए किसी इत्र से कम नहीं थी। वह पिछले पंद्रह दिनों से तसर सिल्क की उस साड़ी पर बारीक मधुबनी पेंटिंग कर रही थी। यह केवल एक साड़ी … Read more

“एक ही घर में दो नियम क्यों?” – संगीता अग्रवाल

दोपहर के तीन बजे थे। अनन्या अभी-अभी अपना लैपटॉप बंद करके उठी ही थी कि डोरबेल बजी। उसने घड़ी देखी और एक गहरी साँस ली। वह जानती थी कि इस समय कौन हो सकता है। यह समय उसकी सासू माँ, निर्मला जी की बचपन की सहेली और कॉलोनी की ‘खबर-नवीश’ सरला चाची के आने का … Read more

मायका पराया ससुराल अपना – करुणा मलिक

कार की खिड़की से पीछे छूटते पेड़ों को देखते हुए अवनि की आँखों से बहने वाले आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। ड्राइवर सीट पर बैठे उसके पति, निशित ने एक बार भी उसे चुप कराने की कोशिश नहीं की। वह जानता था कि यह वो सैलाब है जिसे बह जाने देना ही … Read more

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