यह घर है या कोई धर्मशाला – करुणा मलिक
देहरादून की वादियों में बरसात का मौसम था और ‘गुलमोहर विला’ की बड़ी सी बालकनी में पुराने ज़माने का ग्रामोफोन बज रहा था। लता मंगेशकर की मखमली आवाज़ हवा में तैर रही थी— “लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो…” रिटायर्ड कर्नल विक्रमजीत सिंह और उनकी धर्मपत्नी मोहिनी देवी, दोनों ही … Read more