खामोश ढाल: एक अनकहे समर्पण की दास्तान
सुहासिनी अक्सर खिड़की के पास बैठकर बाहर के कोलाहल को देखती रहती थी। शादी के छह साल बीत चुके थे, लेकिन उसे लगता था जैसे उसके और उसके पति, समर के बीच एक अदृश्य दीवार सी खड़ी है। समर एक बेहद शांत, काम में डूबा रहने वाला और कम बोलने वाला इंसान था। सुहासिनी को … Read more