मॉं को बच्चों का साथ चाहिए। – अर्चना खण्डेलवाल

मां, मैंने आपके लिए वो सुन्दर सा शॉल भिजवाया था, आप जब नीचे घूमने जाओं तो यही पहनकर जाना, वसु अपनी मां हेमलता जी से कहने लगी, और हां मां मैंने जो आपके लिए स्वेटर भिजवाया है उसे भी पहन लेना, छोटी बेटी कनु भी बोली। इतने में सबसे बड़ा बेटा यश बोला कि मैंने … Read more

लक्ष्मी पूजन क्यों – संध्या त्रिपाठी

    बेटा पीहू , तू फटाफट रंगोली वगैरह बनाकर घर को सजा ले मैं पूजा की तैयारी करती हूं …और प्रियांश तू भी दीदी का साथ देना..! बाप रे ये दीपावली के दिन भी ना कितना काम हो जाता है …व्यस्तता के बीच निधि ने दीया ठीक से जमा कर रखते हुए कहा ।           मम्मी , … Read more

मुझे भी जीना है केवल सांसें नहीं लेनी हैं – डॉ बीना कुण्डलिया

रंजना ओ रंजना रंजना कहां हो । पति बृजेश ने जैसे ही आवाज लगाई, पति की चिल्लाती हुई आवाज सुनकर रंजना जो रसोईघर में नाश्ते, उनके ऑफिस के लिए लंच की तैयारी कर रही दौड़ती हुई आई बोली क्या हुआ ? आप इतने गुस्से में क्यों चिल्ला रहे हैं ? पति बृजेश तो जैसे नाक … Read more

देहाती लोग कभी नहीं सुधरेंगे !! – स्वाती जैंन

सुनीता बोली सच गाँव के लोगो को शहर के कितने भी तौर – तरीके सीखा लो मगर वे गाँव वाली हरकतें ही करेंगे !! यह सुनकर रुक्मणि जी का दिल एक बार फिर टूट गया , कितनी उम्मीदे लेकर गाँव से आए थे रमाकांत जी और रूक्मणि जी मगर सुनीता दोनों को कुछ भी सुनाने … Read more

सीनियर लगते नहीं

   ” ये क्या आप मुझे हर वक्त सीनियर-सीनियर कहते रहते हैं..मेरा नाम लेते हुए क्या आपका गला दुखता है।” नीरू अपने पति महेश जी पर चिल्लाई।जवाब में वो मुस्कुराते हुए बोले,” अब बच्चे तुम्हारे सयाने हो गये हैं और तुम्हारे बालों पर भी चाँदी चमकने लगी है तो हो गई ना तुम सीनियर..इसमें चिढ़ने वाली … Read more

घर का बोझ – शनाया अहम

अक्सर हम लड़कियों को कभी न कभी बोझ समझा जाता है, कभी कभी ही क्या कुछ घरों में तो हमेशा ही बोझ समझा जाता है अहमियत दी जाती है तो उस घर के बेटों को, बेटियाँ तो बोझ समझे जाने के बोझ तले ही दबी रही हैं।  ऐसी ही एक लड़की थी दिया,,, उसका नाम … Read more

रिश्तों की मिठास – ममता भारद्वाज

मालती और उसके पति मोहित ने अपना एक छोटा सा प्यार भरा आशियाना बनाया हुआ था ।घर छोटा था पर खुशी और प्यार से परिपूर्ण।मालती के पति मोहित एक छोटे से कारखाने में बहुत ही साधारण सी नौकरी करते थे।मालती भी एक लिफाफे बनाने के छोटे से कारखाने में काम करती थी। वह यह कार्य … Read more

खूनी कंगन

सौदामिनी नही रही! जैसा दमदार नाम वैसा ही दमदार व्यक्तित्व था।उनके नही रहने की खबर जो भी सुनता मन ही मन चैन की साँस लेता। सौदामनी का भरापूरा घर था।पति बेहद सीधे-सरल,चार बेटे-बहू दो बेटी-दामाद,छः पोते, दो नाती,दो पोतियाँ और तीन नातिन थी। बड़ी सी हवेली,सैकड़ो बीघे खेती,धन संपत्ति से घर भरा था। घर के … Read more

गरीब घर की बेटी हुं पर संस्कार वाली हुं !! – स्वाती जैंन

मां , मुझे आज बंटू की शादी में जो सोने के कंगन पहनने थे , वह कहीं मिल नहीं रहे , मैंने अपना सारा सामान उल्ट पुलट कर देख लिया नेहा अपनी मां राधा जी से बोली !! राधा जी बोली – अरे बेटा , हो सकता हैं तु ससुराल से ही लाना भूल गई … Read more

अर्धांगिनी हुं मैं तुम्हारी !! – स्वाती जैंन

अर्धांगिनी , नहीं नौकरानी हो तुम , मेरा सब काम करती हो , मेरे लिए खाना बनाती हो , मेरे बच्चों को देखती हो इसलिए इस घर में हो और वैसे भी तुम्हारे मायके में तुम्हारे माता पिता भी नहीं हैं तो वहां भी कौन रखेगा तुम्हें ?? इसलिए तुम पर तरस खाकर तुम्हें यहां … Read more

error: Content is protected !!