मखमल के पर्दे – रश्मि प्रकाश
“हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि बाजार से हम ‘सुविधा’ खरीद सकते हैं, लेकिन ‘परवाह’ नहीं। जब करियर की दौड़ में एक माँ हारी, तो उस ‘घरेलू’ भाभी ने ही जीत दिलाई जिसे वो हमेशा कमतर समझती थी।” “अरे वाह नताशा! ये नई गाड़ी? और ये बैग तो पक्का इटैलियन ब्रांड का है?” पड़ोस … Read more