अंतहीन यात्रा – संजय मृदुल

मालगाड़ी आवाज़ करती हुई रुकी। सुबह का धुंधलका छंटने लगा है, पूरब से हल्की लालिमा बिखर रही है। खुशनुमा दिन की शुरुआत हो रही है और राहुल का मन खाली है। धीरे से उसने बाहर झांक कर देखा। चारों ओर खेत और उनमें लगे पेड़ दिखाई दे रहे हैं। खेतों से पीछे दूर चिमनियों से … Read more

बुढ़ी आंखें सब पहचानती है !! – स्वाती जैन

अर्जुन ,  कुछ सीखो तुम्हारे दोनों बड़े भाईय़ों से, राजीव पढ़- लिखकर नौकरी पर लग गया और आनंद की भी बस पढ़ाई पुरी होने को हैं और एक तुम हो जिसे बस एक्टिंग का भूत सवार हैं , गुस्से में बोले हरिशंकर जी !! अर्जुन बोला- पापा, पढ़ाई में मन नहीं लगता हैं मेरा, मैं … Read more

भागी भगोड़ी बेटी – डॉ बीना कुण्डलिया 

बारह बर्ष पहले घर छोड़कर चली गई नमिता, आज घर लौट कर आ रही है । जिन्दगी की भागदौड़ से थककर सुकून की तलाश करती उसकी वापसी हुई। उसने देखा कितना कुछ बदल गया। उसका वो छोटा सा कस्बा कच्ची पगडंडियों की जगह सड़क बन गई। जगह जगह बस स्टॉप बन गये । पहले जब … Read more

अंतिम निर्णय – दिक्षा_बागदरे

मधुर और राइमा लगभग 25 सालों का दांपत्य जीवन साथ बिता चुके थे। मगर पिछले कुछ समय से दोनों के बीच एक शीत युद्ध  चल रहा है।  ऐसा नहीं था कि उनके बीच कभी कोई वाद-विवाद ना हुए हो। वाद-विवाद तो हर पति-पत्नी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।  यह कहानी घर-घर की … Read more

एक मां की चुप्पी को उसकी कमजोरी मत समझना – स्वाती जैंन

दरवाजे की बेल बजी वैसे ही तान्या बोली -लो आ गई तुम्हारी मां पार्क से , आज ऐसी डांट लगाना रोहित कि तुम्हारी मां पार्क जाना ही भूल जाए !! रोहित ने दरवाजा खोला और यशोदा जी से बोला – मां यह बार – बार पार्क घूमने क्यों चली जाती हो ?? घर में कितने … Read more

आखिर कब तक? – परमा दत्त झा

गोविंद सिर झुकाकर बैठा था जबकि मां बहन भाई सभी सबाल की बौछार कर रहे थे। खासकर छोटे भाई की पत्नी (बहुरिया)का रोकर बुरा हाल था। हुआ यह कि छोटी बहन रानी का विवाह एक एन आर आई लड़के से ठीक किया।लड़का स्वजातीय है और अमेरिका की किसी प्रतिष्ठित कंपनी में काम करता है। करीब … Read more

ज़हर का घूंट पीना। – लक्ष्मी त्यागी

सुबह की हल्की धूप आंगन में बिखरी थी, चिड़ियाँ आंगन में पेड़ों पर चहचहा रही थीं किन्तु राधा पर तो जैसे इस वातावरण का कोई असर नहीं था। राधा चुपचाप तुलसी के पौधे में जल चढ़ा रही थी उसकी आँखों में न तो आँसू थे, न ही कोई चमक — बस एक गहरी खामोशी थी, … Read more

तुम दोनों से तो मैं गौरवान्वित हूं बेटा – मंजू ओमर

मामा जी ये देखिए मेरा रिपोर्ट कार्ड,मैं क्लास मैं फर्स्ट पोजीशन पर आई हूं । मामा (प्रमोद)जी कुछ बोलते इससे पहले ही वहां मामी आ गई। अच्छा अच्छा ठीक है यहां रिपोर्ट कार्ड लेकर आ गई दिखाने के लिए मेरे बेटे के कम नंबर आए हैं इस लिए ।अब छोड़ो पढ़ाई लिखाई घर के काम … Read more

कड़वी हवा – रवीन्द्र कान्त त्यागी

पूरा हॉल तम्बाकू के कसैले धुंए और अल्कोहल की मिली जुली दमघोंटू महक से भरा हुआ था. निऑन लाइटों के रंगीन प्रकाश बिंदु इधर से उधर उछल रहे थे. कर्णभेदी संगीत की धुनों पर कई जोड़े लिपटकर ऐसे नाच रहे थे जैसे दुनिया में मुहब्बत की परिभाषा इन्ही से शुरू होकर इन्ही पर समाप्त होती … Read more

जो मायके की ना हुई वह ससुराल वालों की क्या होगी – स्वाती जैंन

भाभी , कितनी चालाकी से फंसाया होगा ना आपने मेरे भैया को तभी तो भैया ने पुरे परिवार के खिलाफ जाकर आपसे शादी की हैं , यह मेंहदी , यह लिपस्टिक , यह चेहरे पर इतनी सारी लिपापोती यही सब करके मेरे भाई को अपने वश में कर लिया होगा ना , सिम्मी अपनी नई … Read more

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