शोर में गूंजता प्रेम – माता प्रसाद
“चोर! यह साड़ी मेरी है। तूने चुराकर अपनी अलमारी में रख ली थी न? मैंने रंगे हाथों पकड़ लिया आज। सब देख लो, यह बहू नहीं, चोर है!” रेवती देवी चिल्लाईं। पूरे ड्राइंग रूम में सन्नाटा छा गया। विकास का चेहरा शर्म से लाल हो गया। बॉस और उनकी पत्नी असहज हो गए। रसोई से … Read more