आख़िर मेरा भी अस्तित्व है – मुकेश पटेल
प्रज्ञा बचपन से ही अलग तरह की लड़की थी।बचपन में जब मोहल्ले की लड़कियाँ गुड़िया-गुड़िया खेलती थीं, वह किसी पुराने रेडियो को खोलकर उसके तारों को जोड़ने में लगी रहती। स्कूल में भी उसका मन हमेशा गणित, कंप्यूटर और किताबों में लगा रहता। पढ़ाई में वह इतना तेज़ थी कि पूरे जिले में उसका नाम … Read more