खनकते सिक्के
रवि एक मेधावी छात्र था। उसके पिता, सोहनलाल, एक पुरानी कपड़ा मिल में दिहाड़ी मज़दूर थे, जहाँ काम मिलने का कोई पक्का भरोसा नहीं होता था। माँ, कौशल्या, घर पर ही बीड़ी बनाने का काम करती थीं, जिससे घर में नमक-तेल का खर्च निकल आता था। रवि ने बारहवीं की परीक्षा ज़िले में टॉप की … Read more