क्या? मम्मी जी आपके यहां करवा चौथ नहीं मनाते। – ज्योति आहूजा

हर लड़की की तरह सारिका के मन में भी शादी को लेकर तरह- तरह की उमंगे थी। शादी के बाद उसका ससुराल कैसा होगा? ससुराल में हर तरह के फंक्शन, त्यौहार खूबधूमधाम से मनाए जाते हो। सजने सवरने की शौकीन सारिका इसी उमंगों के साथ अपना रिश्ता होने के बाद शादी के दिन का इंतजार … Read more

अनचाही बहू

“कंडक्टर साहब, यहीं उतार दीजिए… मोती विहार स्टॉप आ गया क्या?” “हाँ हाँ, यहीं है, उतर जाओ अम्मा जी,” बस रुकते ही कंडक्टर ने आवाज़ लगाई। शोभा ने एक हाथ में स्टील का डब्बा, दूसरे में बैग सँभाला और धीरे-धीरे बस से नीचे उतरीं। पीछे से महेन्द्र भी सैकड़ों कोशिशों के बाद बस की सीढ़ियाँ … Read more

ओवरवेट – हेमलता गुप्ता 

“बहुत मुबारक हो वर्मा जी… ऐसा सुंदर , हैंडसम लड़का… और ऊपर से यूएस रिटर्न इंजीनियर!”रहीश खान ने हँसते हुए कहा तो मोहनलाल की मूँछें गर्व से तन गईं। “कहाँ भैया, हमारी औक़ात ही क्या है इनके सामने, खुद चलकर रिश्ता लेकर आए हैं तो ऊपर वाले की मेहर है,” मोहनलाल ने विनम्रता से जवाब … Read more

रिश्तों की नई शुरुआत – निभा राजीव

सुबह के नौ बज चुके थे, पर मीरा अभी तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकली थी। खिड़की के परदे आधे खिंचे हुए थे, कमरे में हल्की-सी धुंधलाहट थी। बिस्तर पर बैठी वह खाली नज़र से दीवार को देख रही थी। पिछले पंद्रह दिनों से वह मायके में ही थी और उसके चेहरे से जैसे … Read more

सोने की अंगूठी – रश्मि प्रकाश 

“कमल बाबू, आख़िरी बार समझा देता हूँ… जो  बात तय हुई है, वह निभानी पड़ेगी, वरना… फिर हम भी ज़िम्मेदार नहीं होंगे,”लड़के के ताऊ हरिराम ने धीमी लेकिन कड़वी आवाज़ में कहा। कमलदास ने धोती की गठान कसते हुए, मुस्कुराने की कोशिश की,“अरे भाई साहब, आप तो घर के बड़े हैं, आपकी बात सिर–आँखों पर… … Read more

अब के सज्जन सावन में – संध्या त्रिपाठी

सुबह के नौ बजने में पाँच मिनट बाकी थे, लेकिन किचन की घड़ी मानो तेजी से भाग रही थी। “किरण, मेरी सफ़ेद शर्ट इस्त्री हुई या नहीं? मीटिंग है आज, तुम जानती हो न!”आदित्य ने अलमारी से फाइल निकालते हुए ऊँची आवाज़ लगाई। किरण ने गैस पर तड़तड़ाते तवे की तरफ़ देखा, पराठा पलटते-पलटते घबराते … Read more

सर्वगुण संपन्न भाभी – हेमलता गुप्ता

क्लास ख़त्म होते ही कॉलेज की घंटी बजी तो सब लड़कियाँ अपने-अपने ग्रुप में फुसफुसाते हुए बाहर निकलने लगीं। कैम्पस के बीचोंबीच लगे पुराने पीपल के पेड़ के नीचे रिया अपनी दो सहेलियों—साक्षी और मान्या—के साथ खड़ी थी। तीनों के हाथ में किताबें थीं, पर बात किसी और ही विषय पर चल रही थी। “अच्छा … Read more

परवरिश – सविता गोयल

“हैलो दीदी, कैसी हैं आप?ओह, मैं भी क्या पूछ रही हूँ — आपके तो मजे हैं, अब नई बहू रानी से खूब सेवा करवा रही होंगी!”वंदना ने चहकते हुए अपनी ननद कुसुम से फोन पर पूछा। “हम ठीक हैं,” — कुसुम के मुंह से इतनी ठंडी प्रतिक्रिया सुनकर वंदना को बहुत आश्चर्य हुआ।अभी छह महीने … Read more

थोड़ा समय मुझे भी चाहिए – मुकेश पटेल

“बस, अब और नहीं, निखिल… आज तो मुझे बोलने दो,”सिया ने बरामदे में कपड़े फैलाते-फैलाते अचानक बाल्टी ज़मीन पर रख दी। उसकी आवाज़ में रोना भी था और थकान भी। निखिल ने अख़बार से सिर उठाया, चश्मा थोड़ा नीचे खिसका,“क्या हुआ फिर से? सुबह-सुबह तने हुए चेहरे का मतलब है, कुछ ना कुछ शुरू होने … Read more

मैंने जिसे हीरा समझा वह तो नालायक निकला !! – स्वाती जैंन

तुम लोग उधार के पैसे से मुझे सेव और पपीता जैसे फल खिला रहे हो , फल खरीदने तक के पैसे नहीं हैं तुम्हारे पास ?? मैं तो कहती हुं अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा तुम्हारे पति मोहित को समझाओ कि उसके छोटे भाई रोहित से पैसे मांग ले , क्या जरूरत थी जलन के … Read more

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