“वो खामोश मालकिन” – वर्षा मंडल
“सूट-बूट पहनकर बोर्ड मीटिंग में फैसले लेना ही सिर्फ़ आज़ादी नहीं होती, कभी-कभी घर की चारदीवारी में रहकर अपनी शर्तों पर दुनिया चलाना उससे भी बड़ी ताक़त होती है। पढ़िए एक ऐसी कहानी जो नारीवाद (Feminism) की आपकी परिभाषा बदल देगी।” “तुम लोग समझती हो कि साड़ी पहनने वाली, धीमी आवाज़ में बात करने वाली … Read more