झूठी शान के खंडर – संगीता अग्रवाल
“अक्सर हम जिसे अपना खून कहते हैं, वही हमारी रूह को छलनी कर देता है, और जिसे पराया समझते हैं, वो हमारे स्वाभिमान की ढाल बन जाता है। क्या एक बेटे के लिए ‘सच’ बड़ा है या ‘परिवार की झूठी इज़्ज़त’?” — “तमीज़ तो मैं तब भूल गया था भैया, जब मैंने अपनी आँखों से … Read more