जज़्बातों का डाकिया – रोनिता कुंडु
*इस डिजिटल युग में जब उंगलियों के एक टच से संदेश पहुँच जाते हैं, तब एक बूढ़ा जोड़ा पुराने संदूक से स्याही और कलम निकालकर टूटे हुए दिलों को जोड़ने का काम कर रहा था। क्या उनकी यह ‘पुरानी आदत’ आज के ‘नए दौर’ के रिश्तों को बचा पाएगी?* “सुधा… ओ सुधा! अरे, वो नीला … Read more