रक्षाबंधन – के आर अमित :
आज सुबह से ही हड़बड़ाहट में लग रहे हैं चेहरे पे खुशी है पर घबराहट में लग रहे हैं खुद ही खुद से करके बाते मुस्कुराने लगते जाने क्यों दादाजी बड़बड़ाहट में लग रहे हैं। चश्मा साफ करके कभी रास्ता ताक रहे हैं तो कभी दीवार पे टँगी घड़ी को झांक रहे हैं कभी खो … Read more