दंश – अलका प्रमोद : Moral Stories in Hindi

अभी मैं क्लीनिक से आकर बैठी ही थी कि मिस्टर वर्मा का फोन आ गया। वह बुरी तरह घबराए हुए थे, उन्होंने रूआँसी वाणी में कहा, “डॉक्टर आप तुरंत आ जाइए, ऋतिका को पता नहीं क्या हो गया है, साँस ही नहीं ले पा रही है।” मैं समझ गयी कि जिस घड़ी से मैं डर … Read more

पापा तुम कहाँ हो – अलका प्रमोद : Moral Stories in Hindi

“सच शकुन के पापा ऊपर वाले का धन्यवाद है कि उसने भले ही हमे लड़का नहीं दिया पर हमारी तीनों बेटियाँ और दामाद इतने भले हैं कि हमे कोई कमी नहीं, उस पर अपना दिनेश और उसकी बहू जितना मानते हैं वह तो शायद पेट जाया भी न करे।” इस पर रामेश्वर चुटकी लेते और … Read more

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