देवकी – अभिलाषा श्रीवास्तव :

 Moral Stories in Hindi “चाची नहीं छोटी माँ है आप हमारी” कहते हुए किशन अपनी नई नवेली चाची के गोद में बैठ गयें तो दिपा निश्छल प्रेम से देखतीं रहीं अमर सिंह के परिवार में नई बहू के रूप में साक्षात गृहलक्ष्मी आ चुकीं थीं अत:बिना किसी कलेश के दोनों बेटों का परिवार हंसी खुशी … Read more

दो चेहरे-मनीषा सिंह

“मां •••!मुझे डर लग रहा है प्लीज अगर हो सके तो पापा को यहां भेज दिजीये•• ताकि मैं उनके साथ चली आऊ!  रात के 12:00 बजे कली अपनी मां को फोन लगाती है परंतु उधर से कोई जवाब न मिल पाने के कारण वह घबरा जाती है और पुनः काट कर डायल करती है। हेलो-हेलो-हेलो! … Read more

हाँ मैं हूँ सावित्री – बालेश्वर गुप्ता

   आपकी आंखों में आँसू मैं देख नही पाती, उपेंद्र तुमने अपना जीवन खुद जिया है, बनाया है तो क्यों इतना कमजोर होते हो?सुनो मैं हूँ ना,तुम्हे यमराज के हाथों से भी छीन लाउंगी।बस तुम हिम्मत मत हारो।      मालती के कहे शब्दो का असर ही था कि एक माह बाद  उपेंद्र ने आंखे खोल भरपूर दृष्टि … Read more

“और दूरियां मिट गई” – ज्योति आहूजा

सूरज की हल्की रोशनी प्राची के कमरे में धीरे-धीरे फैल रही थी। अलार्म की घंटी बजी और 45 साल की प्राची उठ गई। कुछ साल पहले उसके पति गुजर चुके थे, और तब से घर की सारी जिम्मेदारियाँ उसके कंधों पर थीं। बेटी नेहा की परवरिश, घर का खर्च, ऑफिस का काम — सब कुछ … Read more

काली रात – अर्चना खण्डेलवाल

रश्मि इस वक्त तेरा पार्टी में जाना सही नहीं है, तेरे पापा भी घर पर नहीं है, और अगर कल को कुछ हो जाता है तो पापा मुझे बहुत ही डांटेंगे, मैं उनसे पूछे बिना तुझे जाने की आज्ञा नहीं दे सकती हूं, सरला ने समझाकर कहा ताकि रश्मि मान जायें। ओहह!! मेरी प्यारी मम्मी … Read more

आदर्श परिणय – सुनीता मुखर्जी “श्रुति” :  Moral Stories in Hindi

लावण्या टेढ़ी-मेढ़ी गांव की मेड़ पर उछल-उछल कर चल रही थी। अरे लावण्या खेत में कितनी सब्जी हो गई है कुछ तुड़वा लो..!  लावण्या अपनी धुन में इधर-उधर कुछ देख- देख कर चल रही थी। अम्मा की बात सुनकर लावण्या भी खेत से भिंडी तरोई और टिंडे तुड़वाने में मदद करने लगी।  लावण्या बहुत खूबसूरत … Read more

काली रात – मधु वशिष्ठ :  Moral Stories in Hindi

मेरी उपस्थिति शायद किसी को महसूस ही नहीं हो रही थी। तीनों बहनें चाचा जी के बेटे से गले मिलकर रो रही थी, भैया यह कैसी काली रात आई हमने तो अपने पिता को ही खो दिया और वह चाचा जिनको कि पिताजी और माता जी सौ सौ गालियां देते थे कि इन्होंने दादा जी … Read more

काली रात – गीता अस्थाना :  Moral Stories in Hindi

हीरालाल जी बड़े ही गर्म मिज़ाज और थोड़े झगड़ालू स्वभाव के व्यक्ति थे।आए दिन मुहल्ले में उनकी क्रोधपूर्ण आवाज़ सुनाई पड़ जाती थी। कभी पत्नी से बहस करते हुए, कभी बच्चों को डांटते हुए या कभी अपने किसी किरायेदार से झड़प करते हुए। आसपास के लोगों के लिए एक तमाशे का माहौल बन जाता था। … Read more

वो काली रात – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

 देखिए, कैसे मैं रेखा सड़क पर कटी पड़ी हूं। तड़प तड़प कर मर रही हूं। कोई देखने वाला भी नहीं। एक ट्रक ने टक्कर मारी और मैं उसके पहिए के नीचे आ गई। मैं बीच में से कट गई। कमर से नीचे का हिस्सा अलग और ऊपर का अलग। आह!आह! बहुत दर्द हो रहा है, … Read more

नई सुबह का सूरज – निभा राजीव”निर्वी” : Moral Stories in Hindi

सबकी प्यारी दुलारी सत्रह वर्षीया आशी! उस बड़े से संयुक्त परिवार की लाडली! घर में उसके मां पापा, भाई, दादा, दादी, चाचा, चाची, चचेरी बहन, और चचेरा भाई। सबके प्रेम प्यार और एकता का अद्भुत संगम था इनका परिवार! और आशी… वह तो सबसे छोटी सबकी आंखों का तारा थी! सब जी भरकर नेह लुटाते … Read more

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