बहु जब लड झगड़कर अपने मायके पहुंची तब उसे हुआ आत्मग्लानि का एहसास !! (भाग 1) – स्वाति जैन : Moral Stories in Hindi

 Moral Stories in Hindi :निकल जाओ तुम लोग अभी की अभी मेरे घर से , भगवान यह दिन दिखाने से पहले काश मुझे उठा लेते , इतने सालों से जो परिवार एक साथ रहा मैं नहीं जानता था वह इस तरह टूटेगा , क्या यही दिन देखने के लिए तुम लोगों को इतना बडा किया … Read more

*स्पष्ट वादिता* – पुष्पा जोशी : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  नीरज की अभी छह महिने पूर्व शादी हुई थी, और उसे आज उसके ससुराल बुलाया गया था। नीरज का ससुराल बहुत पैसे वाला था, और रोमा उनकी इकलौती, लाड़ली बेटी थी। नीरज बेहद खूबसूरत,लम्बापूरा नौजवान था। जो देखता, देखता ही रह जाता। प्रभावशाली व्यक्तित्व था उसका। नीरज और रोमा एक … Read more

आत्मग्लानी – माधुरी : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : एसी कोच में बैठे होने पर भी सुधा जी केचेहरे पर पसीना आ रहा था,बगल में बैठे पति मनोहरजी ने पूछा   क्या बात है है तबियत तो ठीक है न तुम्हारी इतना पसीना क्यों आरहा है फिर।नहीं कुछ नहीं बस ऐसे ही मन में कुछ पिछली कडबी यादें सिर उठा … Read more

सुबह का भूला (आखिरी भाग )- नीलम सौरभ

स्तुति ने पूरी तत्परता से न सिर्फ अपने जेठ को सही समय पर अस्पताल पहुँचाया बल्कि वहाँ के लापरवाह स्टाफ से लड़-भिड़ कर उन्हें तत्काल एडमिट भी करवाया। वहाँ उपस्थित अस्पताल के छोटे कर्मचारी जब आदत से मजबूर आनाकानी कर रहे थे, स्तुति दनदनाती हुई मुख्य चिकित्सक के ऑफिस में घुस गयी। उसने जब अपने … Read more

सुबह का भूला (भाग 3)- नीलम सौरभ

___”कुछ कीजिए न मम्मीजी, पापाजी…इनको कुछ भी हुआ तो मैं भी जिन्दा नहीं बचूँगी मम्मीजी…कुछ करो न छोटी…सिद्धांत भइया को फोन करो ना जल्दी..!” घर का बड़ा बेटा सुदर्शन यानी सिद्धांत का बड़ा भाई आज पुश्तैनी गाँव के लिए निकला हुआ था। हमेशा की तरह अपने फार्महाउस के बहुत सारे कामों को देखने के लिए। … Read more

सुबह का भूला (भाग 2)- नीलम सौरभ

शुरू-शुरू में उससे बार-बार गलतियाँ हो जातीं और उसे सासू माँ के कोप का भाजन बनना पड़ता। साड़ी पहन कर काम करना उसके लिए संसार के सबसे कठिन कामों में से एक था, अतः वह सलवार कमीज पहन कर सिर पर दुपट्टा लपेट लेती। अनुराधा जी को यह भी बहुत नागवार गुजरता। सिर से पल्ला … Read more

सुबह का भूला (भाग 1)- नीलम सौरभ

“नहीं मम्मीजी, ऐसा तो अब कहीं नहीं होता…और होता भी होगा तो मुझसे नहीं हो पायेगा!” आज यह पहली बार था कि परिवार की छः माह पुरानी छोटी बहू स्तुति सास की असंगत बात सह नहीं सकी थी तो उलट कर बोल पड़ी थी। वह अब तक विदाई के समय माँ, ताई जी व बड़ी … Read more

आत्मग्लानी – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : एक तो सर्दियों के दिन वैसे ही छोटे होते हैं उस पर से ठंड में काम करने का मन भी नहीं करता। रजनी को भी काम निपटाते निपटाते 1:00 बज गया, सोचा.. बच्चों को आने में एक घंटा है तब तक थोड़ी देर धूप का आनंद ले लिया जाए! जैसे … Read more

तू हमारी बहु नही बेटी है – निशा जैन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : रागिनी के आंसू आज फिर छलछला आए….. जब भी वो ये तस्वीर देखती उसका दर्द उसके आंसू बनके बह निकलता। “तू फिर ये तस्वीर ले बैठी, कितनी बार कहा है मत देखा कर ये तस्वीर , सविता जी ने अपनी बहु के हाथ से तस्वीर छीनते हुए कहा”                                  “रागिनी, मेरी … Read more

छलनी कर डालना – पुष्पा जोशी : Moral Stories in Hindi

 ‘बस ताऊजी आप रहने दीजिये,ये मेरी माँ है इनका ध्यान मैं रख लूंगा।’   ‘देखो तो इसकी हिम्मत अपने ताऊ से जबान लड़ा रहा है, तेरी इतनी हिम्मत, अभी बताती हूँ।’ कहकर विमला जी ने कृष्णा को मारने के लिए हाथ उठाया तो उसने उनका हाथ पकड़ लिया। वह बोला- ‘माँ हम अब यहाँ नहीं … Read more

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