कुछ रिश्ते खून के रिश्तों से बड़े होते हैं – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’

 आज 5 दिन बाद अस्पताल से विनय बाबू को छुट्टी मिलने वाली थी…इन दिनों में उनके साथ लगातार उनकी पत्नी सरला जी ही रहीं वरना कुछ परिचित लोग तो औपचारिकतावश उनसे मिलने आते और हालचाल पूछकर चले जाते। अस्पताल भी घर से दूर था तो कामवाली से भी किसी मदद की उम्मीद नहीं थी अतः … Read more

अनाम रिश्ता – बालेश्वर गुप्ता 

  मुन्ना-मुन्ना, अरे आज तू चाय पीने नहीं गया, क्या हुआ तुझे,तेरी तबीयत तो ठीक है ना?           कुछ नहीं आंटी, ऐसे ही सर  दर्द कर रहा था,उठने को मन ही नही कर रहा था.          देख मैं तेरे लिये चाय और टोस्ट ले आयी हूं. तू चाय पी ले मुन्ना,मैं तुझे सेरिडान की गोली ला कर देती … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – दीपा माथुर

जो पेड़ नई कोपलों का स्वागत नहीं करते वे ठूठ हो जाते है अम्मा ने हसते हुए विभु को कहा। अम्मा का ८४ का बसंत पार हो रहा था। चाहे मुंह में दांत हो ना हो अम्मा हमेशा हर काम जोश से करती थी। हा अब काम की स्पीड में कमी हो गई थी पर … Read more

इस गुनाह की माफी नहीं – परमा दत्त झा

आज सुखिया और दिलभजन मंडल पर पंचायत बैठी थी।गांव के पंच परमेश्वर और सरपंच राम चौधरी,मुखिया जुम्मन शेख सहित लगभग चार सौ लोग उस पीपल पेड़ तले बैठे थे। सरपंच हुजुर,सुखिया को गांव से बाहर निकाला जाय, हुक्का पानी बंद किया जाए -यह कंटीर मिश्रा थे जो सुखिया पर आंख गड़ाए थे। हां हुजूर कंटीर … Read more

सीख – सुनीता मुखर्जी “श्रुति “

आराधना की प्रथम पोस्टिंग महानगर में हुई। वह बड़ी-बड़ी इमारतें, मॉल, सिनेमा घर, और पार्क और भीड़ भाड़ देखकर अवाक थी । उसने यह सब टेलीविजन में देखे था। एक छोटे से गांव की बाला …कम उम्र में ही उसका विवाह हो गया।  विवाह के पश्चात उसने पढ़ाई करने की ठानी,और यह संकल्प लिया कि … Read more

हां मैं स्वार्थी हूं। – मधु वशिष्ठ

जी हां हो गई हूं मैं स्वार्थी इतना कहकर रीना अपनी बेटी श्रेया को पढाती रही। बाहर से गुस्से से भरी आवाजें आती रही। रसोई में भी  बर्तनों का बजना जारी था।      आइए आपको रीना के परिवार से मिलाऊं। रीना संयुक्त परिवार में थी जिसमें कि उसके दो देवर और दो ननदें थी। आम संयुक्त … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी… – तोशिका

मैं कई बार सोचती हूं कि अगर मैं उसको ऐसे बोलती तो शायद आज हमारा रिश्ता ऐसा होता। मैने और मेरी दोस्त रानी ने एक नया क्लब ज्वाइन किया था यही कुछ पांच महीने पहले। वहां का माहौल बहुत उत्सुकता से भरा हुआ था और कई लोगों से हमने बात भी की और उनके बारे … Read more

भाभी का सम्मान – लतिका पल्लवी

रिश्ते बनाए नहीं जाते है बन जाते है और जो रिश्ता दिल से बन जाता है सही मायने मे वही रिश्ता होता है और वही रिश्ता सही से निभता भी है। आज मै आपको एक ननद -भाभी के रिश्ते की कहानी सुनाती हूँ जो थोड़ा फंतासी लगेगा पर सच के बहुत ही करीब है। बस … Read more

साथ का रिश्ता – शुभ्रा बैनर्जी

हां सास है वे मेरी,मां नहीं।बहू हूं मैं पर बेटी नहीं।ना उन्होंने मुझे जन्म दिया,ना मैं उनकी गोद में खेली।आज पैंतीस सालों से लगातार साथ रहते-रहते हम ,सास-बहू के बीच एक अनोखा  रिश्ता बन‌ चुका है।यह रिश्तों का बंधन दुनिया को समझ नहीं आता,क्योंकि यह खून का नहीं। पैंतीस साल पहले इस घर में अपने … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी ! – नीलम गुप्ता

जब हमारा यह मकान बन रहा था तो मैं अक्सर यहां आती रहती थी यह देखने की अब क्या बन रहा है जो बन चुका है वह कैसा लग रहा है या फिर यूं ही मन करता है ना वहां जाने का जहां अब आप जाकर रहने वाले हो ! इस दौरान सोसाइटी के कई … Read more

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