नियति का रंग – बालेश्वर गुप्ता
“देखो मनीष, कुसुम मेरी बहू है, पर जब वह वंश बढ़ाने में सक्षम नही है, मुझे पोता नही दे सकती, मां ही नही बन सकती तो कुछ तो सोचना पड़ेगा ना। वह घर मे रहे मुझे आपत्ति नही, पर तुझे दूसरा ब्याह करना ही पड़ेगा। समझ रहा है ना तू?” मनीष की आँखों में दर्द … Read more