अपमान का घूंट – हेमलता गुप्ता 

अरे जब बाप ही ऐसा हो, तो बेटी तो ऐसी होगी ही ना, ससुर जी जरा सख्त होते हुए बोले… पहली बार ससुराल आए पिता की बेज्जती होते देख, बेटी ने सास ससुर को सिखाया ऐसा सबक कि उनके होश उड़ गए…. शहर के सबसे पॉश इलाके ‘सिविल लाइन्स’ में स्थित मल्होत्रा मेंशन आज रोशनी … Read more

माँ का फ़ैसला सुन बेटे को आ गया पसीना – रश्मि प्रकाश

65 वर्षीय वृद्ध विधवा मां से बेटा बहू वृद्धाश्रम में मिलने और धोखे से उनकी सारी प्रॉपर्टी अपने नाम कराने पहुंचे तो वहां पर वृद्धाश्रम के मैनेजर ने उनको दिया एक ऐसा तोहफा कि उनके पैरों तले जमीन खिसक गई  दोपहर की चिलचिलाती धूप में ‘आनंदम वृद्धाश्रम’ का लोहे का गेट खुला और एक चमचमाती … Read more

“ये क्या बात हुई मम्मी जी? मैं आपके पूरे घर के लोगों के लिए सोचूं … – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव 

” ये क्या बात हुई मम्मी जी? मैं आपके पूरे घर के लोगों के लिए सोचूं। और आप लोग मेरे बारे में बिल्कुल भी ना सोचो। अब घर में मेहमान हों और घर की बहू कमरे में कुंडी लगाकर बैठी रहे, यह अच्छा लगता है क्या? लोग क्या कहेंगे? कि भाई-भाभी ने स्वागत नहीं किया?” … Read more

संस्कार पर सवाल – रेखा जैन

“आपने अपनी बेटी को कुछ संस्कार नहीं दिए है!” आद्या के ससुर की कड़कती हुई आवाज फोन पर गूंजी। “समधी जी ऐसी क्या बात हो गई कि सुबह सुबह आप नाराज हो रहे है?” आद्या के पापा उसके ससुर को शांत करने की गरज से बोले। “कल हम आपकी बेटी को मिलने आए थे और … Read more

*कुछ घंटे पहले* – तोषिका

मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया आपने भगवान। क्या गलती कर दी ऐसे की आपने ऐसी सजा दे दी। सीमा चिला चिला कर हॉस्पिटल में स्थापित मूर्ति के आगे रो रो कर पूछ रही थी, तभी वहां पर उसके पिता आए और अपने आंखों से अश्रु पूछते हुए बोले *विधि का विधान कोई टाल नहीं … Read more

माँ ने 25 लाख के लिए बेटा बेच दिया… – मुकेश पटेल

बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, लेकिन शर्मा विला के ड्राइंग रूम में जो तूफ़ान खड़ा था, वह बाहर के मौसम से कहीं ज़्यादा भयानक था। दीवार घड़ी रात के नौ बजा रही थी। कमरे के बीचों-बीच बिखरे हुए काँच के टुकड़े और फटे हुए कागज़ इस बात की गवाही दे रहे थे कि यहाँ … Read more

“पापाजी अब घर में रह रहे हैं.. तो कुछ तो काम करना ही होगा।” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव 

खिड़की से आती धूप अब कमरे के फर्श से हटकर दीवार पर चढ़ चुकी थी। दोपहर के दो बज रहे थे, लेकिन दीनानाथ जी अभी तक अपनी उसी पुरानी आराम कुर्सी पर लेटे हुए थे। उनकी आँखों पर चश्मा टिका था, और हाथ में एक किताब थी जिसका पन्ना पिछले एक घंटे से नहीं पलटा … Read more

परिवार – खुशी

रामनाथ जी अपने परिवार से बहुत प्यार करते थे।उनके परिवार में तीन भाई 2 बहने  और उनकी पत्नियां बच्चे रहते।रामनाथ सबसे बड़े थे।उनकी पत्नी दमयंती 2 बच्चे वृंदा और कुशल उनसे छोटे ज्ञान उनकी पत्नी रागिनी और दो बच्चे अर्पिता और अर्पण और सबसे छोटा हेमंत जो इंजीनियरिंग के आखिरी वर्ष में था। एक खुशहाल … Read more

घर कचहरी नहीं बनेगा! – मुकेश पटेल 

आख़िर छोटी-छोटी बातों में बहू के मायके वालों को क्यों शामिल करना??  शाम के छह बज रहे थे। घर की दीवार घड़ी ने अपना घंटा बजाया, लेकिन सुमन के कानों में वह आवाज़ किसी अलार्म की तरह नहीं, बल्कि किसी आने वाले तूफ़ान की चेतावनी जैसी लगी। वह ऑफिस से अभी-अभी लौटी थी। थकी हुई … Read more

बहु जितनी चादर हो उतने ही पैर पसारने चाहिए – सावित्री मल्होत्रा

दरवाजे की घंटी बजी और डिलीवरी बॉय ने एक बड़ा सा कार्टन बरामदे में रख दिया। पसीने से तर-बतर होकर उसने रसीद पर साइन मांगे। रसोई से बाहर आईं 60 वर्षीय सुमित्रा देवी ने उस विशाल डिब्बे को देखा और उनका माथा ठनका। “यह क्या है?” उन्होंने अपनी बहू, अवनी, से पूछा जो अभी-अभी डिलीवरी … Read more

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