इतनी बेरुख़ी क्यों ….? – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“एक तो ज़बरदस्ती की शादी ,उस पर ऐसा बेरुख़ी भरा व्यवहार…. ये तो ऐसा लगता जैसे किसी को जीते जी मारा जा रहा हो…. बता ना मैंने कहा था क्या अपने घर की बहू बना कर लाओ… खुद ही आई थी मेरा हाथ माँगने तिस पर मेरे मम्मी पापा को भगवान जाने कितने सुहाने सपने … Read more

परहेज – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

अनीशा का दिल आशंकाओं से घिर गया था लेकिन कोई अपराध बोध नहीं था उसे। बात बस इतनी हुई कि आज लड़के वाले उसे देखने आए थे।हालांकि इस तरह देखना दिखाना जैसी बातों से वह परहेज ही करती थी लेकिन पिता के बहुत समझाने पर अनिकेत से एक अनौपचारिक मुलाकात अपने ही घर पर माता … Read more

टूटता विश्वास,बिखरता रिश्ता – डॉक्टर संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

सड़क पर आज प्रेमा को किसीने आवाज़ दी तो वो पलटी…ये कौन हैं,चेहरा देखा भाला लगा,आवाज भी सुनी हुई सी पर कौन हैं,नाम न याद आ पाया। “नहीं पहचाना?”वो बोले,” मै मिस्टर पुरोहित,आपका पड़ोसी,हम द्वारका में संग रहते थे।” “ओह!आकाश पुरोहित भाईसाब!” प्रेमा के मुंह से निकला,”आप तो एकदम बदल गए,कहां इतने रोबीले लगते थे,यूनिफॉर्म … Read more

हमारी बहू महिमा – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

राजन ने घर आकर शाम की चाय अपनी पत्नी रीना के साथ पीते पीते उससे कहा-“कह देना, अपने साहबजादे से कि मैंने उसके लिए एक सुंदर ,पढ़ी लिखी योग्य लड़की विवाह करने के लिए ढूंढ ली है। जब उसके पास समय हो हमें बता दे, उनके घर चलेंगे बात करने और साहब जादे भी लड़की … Read more

गुड़ न्यूज़ – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

आधी रात बीत गई लेकिन लता की आँखों में नींद का नामों -निशान नहीं था..। कल क्या होगा यही सोच -सोच कर परेशान थी। सुबह चार बजे बिस्तर से उठ, नहा -धो कर मंदिर में दिया जला हाथ जोड़ कर बैठी थी, आँखों बंद जरूर थी लेकिन आँखों से बहते आँसू उसकी खराब मनोदशा को … Read more

दुराव – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

पीछे से भैय्या भैय्या की जानी पहचानी आवाज सुन शंकर ठिठक कर रुक गया, अरे ये आवाज तो पलक की है।शंकर का अनुमान सही था,पलक ही शंकर को पुकार रही थी। शंकर भैय्या, मैं कब से आपको ढूंढ रही हूं,रुआँसी पलक  बोली।क्या बात है,पलक,सब ठीक तो है,परेशान सी लग रही हो? शंकर और मनु दोनो … Read more

गाजर मूली समझना – शनाया अहम : Moral Stories in Hindi

रानी ओ रानी , कहाँ मर गई , अब घरवालों ने नाम रानी रख दिया तो क्या सच में ही ख़ुद को रानी समझने लगी , कबसे आवाज़ दे देकर मेरा गला सुख गया , ज़िंदा है या मर ही गई आज??? शांति देवी ने कामवाली रानी को बुलाने के लिए पूरा घर सर पर … Read more

गाजर-मूली समझना – डाॅक्टर संजु झा : Moral Stories in Hindi

राखी  को  जितना अपने रुप और पैसे का  घमंड था ,उसके पति राजीव उतने ही सरल और विनम्र स्वभाव के थे।राखी अपने समक्ष हर किसी को गाजर-मूली के समान तुच्छ  समझती थी,चाहे वो परिवार के सदस्य हों, सहेलियाँ हों या नौकर -चाकर! उसके घमंडी स्वभावके कारण उसके पड़ोसी या दोस्त सभी उससे खिंचे-खिंचे से रहते … Read more

बेटी अब से ससुराल ही तेरा घर है अब तो तू यहां की मेहमान है – मनीषा सिंह। : Moral Stories in Hindi

स्टेशन छोड़ते ही गाड़ी धीरे-धीरे तेज होती जा रही थी ज्यों -ज्यों गाड़ी तेज रफ्तार पकड़ रही थी त्यों -त्यों सरस्वती की आंखों से मां-बाप ओझल होते जा रहे थे। आशु थमने का नाम नहीं ले रही थी मन मारकर अपनी सीट पर जाकर बैठ गई।   अपनी और बच्चों की छुट्टियां खत्म होने के बाद … Read more

बहु को छठी का दूध याद दिला दिया !! – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

क्या कहा तूने ?? दो दिन बाद तुम लोग वापस घर लौट रहे हो !! परसों सुबह की फ्लाईट की टिकटस हो गई हैं !! आंखो में आंसू लिए सुनीता जी बोली !! हां मां , बस दो दिन ओर फिर हम सब वापस साथ होंगे फोन पर बेटा आशीष बोला !! फोन रखकर सुनीता … Read more

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