मैं भी तो एक बेटी हूं। – सीमा गुप्ता
सुबह के साढ़े चार बजे थे। अभी अँधेरा पूरी तरह छँटा नहीं था। अलार्म की घंटी के साथ अनन्या की नींद खुल गई। वह कुछ पल चुपचाप लेटी रही। पास ही सो रहे पति आदित्य की नींद न टूटे, इसलिए वह धीरे से उठी। नहाने के बाद उसने तुलसी के सामने दीपक जलाया। हाथ जोड़ते … Read more