कुटील चाल (भाग-3) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

दूसरे दिन जब भास्कर राव त्रिवेदी पत्नी सुलक्षणा के साथ, वीरेश्वर मिश्रा से अपने घर दिल्ली में वापस जाने की इजाज़त मांगने के लिए उनके कमरे में गए, तो देखा कि वीरेश्वर मिश्रा अभी-अभी आए एक टेलीग्राम को पढ़ रहे थे। उनकी आँखों में आँसू देखकर किसी अनहोनी कि आशंका से भास्कर राव त्रिवेदी ने … Read more

कुटील चाल (भाग-2) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

भरे हुए मन से अरविंद अपने घर पहुंचता है, वह गुस्से से माँ की तऱफ नफ़रत भरी निगाह से देख रहा था, उसने ऑफिस से घर आकर शाम की चाय भी नहीं पी,अनमने ढंग से खाना खाकर अरविंद एक पलँग पर लेट गया, वह परेशान सा एक टक कमरे की छत को देख रहा था, … Read more

कुटील चाल – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

भास्कर राव त्रिवेदी जी इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जज के पद पर आसीन थे, उनकी ईमानदारी ही उनकी दौलत थी, उनके कार्यकाल के दौरान ही उन्हें करोड़ों रुपए की रिश्वत के ऑफर मिले होंगे उनको, फिर भी कभी कोई उनको सच्चे फ़ैसले से नहीं डिगा पाया, छोटा सा परिवार था उनका, पतिव्रता पत्नी सुलक्षणा और … Read more

सुबह का भूला – संजय मृदुल : Moral Stories in Hindi

फाइव स्टार होटल जैसा अस्पताल, भीड़-भाड़ के बीच अल्पना अकेली बैठी है बड़ी सी लॉबी में कॉफी शॉप की एक टेबल पर। कॉफी से उठता धुँवा अल्पना की आंखों में उतर आया है। पापाजी का ऑपरेशन चल रहा है, तीन दिन पहले सुबह-सुबह सीने में दर्द उठा। अल्पना ने जैसे तैसे व्यवस्था कर अस्पताल में … Read more

मन का अब इलाज और नहीं – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

यह आत्मसम्मान विषय पर रची गई कहानी एक विवाह योग्य पुरुष के मन के घांवों की वेदना है।जब पीड़ा का आभास होना ही खत्म हो जाता है,तब चोटिल होता है आत्म सम्मान। नीता के परिवार के पुराने मित्र ,जो अब स्थानांतरित होकर कोरबा में रह रहें हैं ,थॉमस परिवार।जाति में भिन्नता होते हुए भी नीता … Read more

समस्या – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

 मिनी और राघव का विवाह हुए 7 साल बीत गए थे लेकिन उनके घर अभी तक कोई शिशु का आगमन नहीं हुआ था। हालांकि उन दोनों को इस बात से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था लेकिन पड़ोसी रिश्तेदार आने जाने वाले और अब तो कामवाली भी——-। जी हां यहां तक कि घर की कामवाली … Read more

आत्म सम्मान – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

मम्मी कल मैं वापस जा रहा हूं आप भी अपना समान पैक कर लें हमारे साथ चले यहां अकेले कैसे रहेंगी नमिता का बेटा आकाश बोला । नहीं आकाश में तुम्हारे साथ नहीं जाऊंगी , लेकिन मां तुम यहां कैसे रहोगी अकेले ।रह लूंगी बेटा मैं अकेले अभी तक तो तुम्हारे पापा थे लेकिन मैं … Read more

बात आत्मसम्मान की ।। – अंजना ठाकुर : Moral Stories in Hindi

सुमन अपने ससुराल मैं बहुत खुश थी शादी के पांच साल हो गए थे उसने पूरे घर को अपना बना लिया था सास ,ससुर ,देवर ,पति और एक प्यारी सी बेटी पा कर सुमन खुश थी सब लोग सुमन को मान भी बहुत देते ।सुमन का ससुराल भी मध्यम वर्गीय है और मायका भी तो … Read more

रहिमन अति ना कीजिए – कविता झा ‘अविका’ : Moral Stories in Hindi

रेखा सोफे पर अपने पति राकेश के पास बैठी थी। राकेश उसकी सुंदरता पर कायल था। वो दिनभर उसे निहारता रहता। पर उसे यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि उसकी पत्नी की तरफ कोई आंख उठाकर भी देखे। वो सिर्फ उसके लिए बनी है। उसका सजना संवरना हंसना मुस्कुराना सिर्फ और सिर्फ राकेश अपने लिए … Read more

जिस घर में औरतें देर तक सोती है, उस घर की बरकत कभी नहीं होती… – रोनिता : Moral Stories in Hindi

रात के करीब 11:00 रहे थे… कैलाश टीवी देख रहा था… दोनों बच्चे रोहन और अहाना अपने कमरे में सो चुके थे… सुधा जी और मोहन जी भी अपने कमरे में सो चुके थे.. पर कोई एक थी जो अभी तक काम कर रही थी और वह थी प्रिया… वह रसोई को समेट रही थी … Read more

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