“माँ अब तो आप भी सास बन जाओगे, अब बस आप आराम करना और सारा काम भाभी पर छोड़ देना। घर में मेहमान बड़ था है तो उसका कुछ फायदा भी तो होना चाहिए।” फोन पर अपनी माँ नीलू से बात करती हुई उनकी बेटी रिया ने बोला।
“अरे बेटा ऐसे नहीं बोलते, वो पहली बार इस घर में आएगी थोड़ा तो उसे इस घर में एडजस्ट करने में समय लगेगा” नीलू ने अपनी बेटी को समझाते हुए बोला।
पर मां… उससे पहले रिया कुछ बोले कि नीलू के घर की दरवाजे की घंटी बजी और उसने रिया को बोला “बेटा, मैं बाद में बात करती हू कोई आया है घर पर” और नीलू फोन रख देती है।
*शादी वाला दिन*
शादी हो गई थी और सब हो गया था सब एक दूसरे को बधाई दे रहे थे। तभी वहां पर रिया एक दम से बोल पड़ी “भाभी, अब तो आप हमारे घर का हिस्सा है, कुछ दिनों से आप ही घर संभाल रही होंगी।”
तब वहां पर रिया की भाभी मुस्कुराई पर उसको कुछ अटपटा सा लगा क्योंकि शादी से पहले ही उसने बोल दिया था कि वो घर के साथ साथ जॉब भी करना चाहती है जिसपर नीलू ने हामी भी भरी थी। नीलू ने उधर दूसरी तरफ इशारे में रिया को चुप होने को कहा।
अब शादी के दो महीने हो गए थे और नीलू ने अपनी बहु को बिल्कुल बेटी जैसा रखा था, कभी उसे ऐसा महसूस नहीं होने दिया कि वो इस घर की बहु है।
एक दिन रिया अपनी मां से मिलने आई और उसने देखा कि उसकी भाभी जॉब पर गई है और उसकी मां काम कर रही है, इसी बात पर रिया बोली “मां, आपने भाभी को कुछ ज्यादा ही छूट दे रखी है, आप उनसे कुछ भी काम नहीं कराते। एक तरफ मेरी सास है जो मुझे मदद करना तो दूर बल्कि पूछती भी नहीं है।”
नीलू को रिया का बर्ताव थोड़ा ठीक नहीं लगा और उसने बोला “बेटा सबके घर का अलग होता है और तुम्हारी भाभी ने ही शादी से पहले बोल दिया था कि उसको जॉब करनी है और तुमने जॉब करने के लिए मना कर दिया था।”
रिया को लगा उसकी मां भाभी की तरफ दारी कर रही है और अब वो उसको अपनी बेटी नहीं मानती है जिस बात पर वो आग बबूला हो कर बोली “आप बस भाभी की की साइड लो, मैं जा रही हू। वैसे भी आपको मेरे से कोई फर्क नहीं पड़ता।”
जब रिया अपने ससुराल वापस आई तो उसको इतना गुस्से में देख कर उसके पति ने पूछा “क्या हुआ रिया? इतनी जल्दी वापस आ गई घर से अपने?”
रिया ने बोला “अब मेरी वहां कोई जरूरत नहीं है *वो मुझसे ज़्यादा मेरी भाभी की माँ है*
रिया के पति ने उसे बैठाया और बोला “ऐसे क्यों बोल रही हो? कोई भी मां अपनी बेटी को प्यार कम नहीं करता है जब उसकी शादी हो जाती है।”
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला कि तुम्हारी भाभी उस घर में नई कई है और जब कोई अपना इतने सालों का घर छोड़ कर आता है तो उसको नए घर में अपना पन महसूस हुए आखिर एक औरत भी इंसान होती है।
रिया बोली “मैं भी इस घर में नई आई थी मेरी तो किसी ने मदद नहीं की थी।” तभी रिया का पति बोला “रिया, तुम भी जानती हो कि माँ की तबियत ज्यादा ठीक नहीं रहती है इसीलिए वो तुम्हारी मदद नहीं कर पाती है और शुरू शुरू में उन्होंने ही मदद करने की कोशिश की थी लेकिन तब तुमने उनको मना कर दिया था इसलिए उन्होंने दुबारा पूछा ही नहीं क्योंकि वो तुमको परेशान नहीं करना चाहती थी।”
रिया को अपनी गलती का एहसास था और उसने अपने पति से माफी मांगी और तब उसके पति ने बोला “माफी मुझसे नहीं बल्कि अपनी मां सा मांगो।”
तभी रिया ने ऑनलाइन एक गिफ्ट घर भिजवाया नीलू और अपनी भाभी के लिए और अपनी मां को कॉल करके माफी मांगी और उधर से नीलू बोली ” मेरे लिए तू और तेरी भाभी दोनों बेटियां समान हो, और मैं भगवान का शुक्र मानती हू कि उन्होंने मुझे दो बेटियां दी।”
लेखिका
तोषिका