क्यों माँ का मायका, माँ का ही रह जाता… – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

   दादा जी पूजा ख़त्म हो तो इधर आइये, हम, आप और पापा तीनों की एक सेल्फी तो बनती हैं..। कह अवि दादा जी के साथ सेल्फी लेने लगा..। आज दिवाली हैं… सब लोग पूजा करने के बाद फोटो लेने लगे.। दादा जी के साथ मग्न, अवि को देख आज संध्या को अपने पिता की … Read more

*उलझन* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

      अरे रमेश इतने दिन बाद दिखाई दिये हो,कहाँ थे?        सुरेश तुम,वास्तव में भाई काफी दिनों में मुलाकात हुई है।असल  मे भाई मैं बेटे के पास  विदेश चला गया था।इसी कारण मुलाकात नही हो पायी थी।खैर अब मिलते रहेंगे।        रमेश और सुरेश बचपन के मित्र थे।रमेश के एक बेटा था जो अमेरिका में जॉब कर रहा … Read more

आत्मसम्मान की पहल – अमिता कुचया : Moral Stories in Hindi

एक दिन बच्चों की डायरी में फीस जमा करने का नोटिस लिखा होता है। और फोन पर भी फीस जमा करने की आखिरी डेट का मैसेज देखकर कंचन परेशान होने लगती है। उसको लगता कि ऐसा क्या करु कि पैसों का इंतजाम होने लगे।  कंचन के पति की जॉब छूट हुए छह महीने हो गये … Read more

सौभाग्य वती,चिढ़ होती है मुझे इस शब्द से – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

सौभाग्यवती हो , सौभाग्यवती रहो ये क्या हैं शुभम घर में मैं जब भी मम्मी या दादी के पैर छूती हूं यही सुनने को मिलता है।खुश रहो , हंसते मुस्कुराते रहो ये कोई क्यों नहीं कह सकता ।तो इसमें हर्ज ही क्या है सोनल ये तो बहुत अच्छी बात है कि तुम्हें बड़ों के पैर … Read more

अनमोल रिश्ते – पूजा शर्मा : Moral Stories in Hindi

महेश की बुआजी से फोन पर हुई बातों  से गरिमा बहुत परेशान हो गई थी और सोचने पर मजबूर हो गई थी कि सही तो कह रही हैं  बुआ जी जब से मैं इस घर में आई हूं अपनी सारी जिम्मेदारियां अच्छी तरह से निभाई है  और जब मेरे बच्चों का समय आया तो मैं … Read more

एक अजनबी – बेला पुनिवाला. : Moral Stories in Hindi

     राह चलते, जाने अनजाने एक अजनबीने हमारी ज़िंदगी ही बदल दी। दर्द हम को इस बात का नहीं की उसने हमें छोड़ दिया, दर्द इस बात का है, की बिना किसी वज़ह और बिना बताए उसने हमें छोड़ दिया और  उनके यूँ  चले जाने से बेवफ़ा हम ने उनको समज लिया, शायद हमें कुछ बता … Read more

माँ का प्यार – संजय निगम : Moral Stories in Hindi

“सुबह का समय था। सूरज की हल्की किरणें खिड़की से अंदर झांक रही थीं। माँ अपने छोटे बेटे को निहारते हुए मुस्कुरा रही थी। बेटा, जो शायद अभी-अभी चलना सीख रहा था, छोटे-छोटे कदमों से कमरे के एक कोने से दूसरे कोने तक जा रहा था। उसके पैरों की थोड़ी लड़खड़ाहट और संतुलन बनाने की … Read more

एक पाप, एक अधर्म – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

देवार्चन की समझ में नहीं आ रहा था कि उसने जो किया है वह गलत है या सही। कुछ लोग उसके इस कार्य के लिये उसे पापी और विधर्मी भी कह सकते हैं लेकिन उसके मन में कोई ग्लानि या अपराध बोध नहीं है बल्कि उसके मन में सन्तोष और तृप्ति का उजाला फैला है। … Read more

मिट्टी की पुकार – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

गौरांश के बेटे गन्धर्व की पसंद मुरलिका अपने मम्मी पापा के साथ आज उसके घर आने वाली है। इसलिये घर में काफी चहल पहल थी। उसकी अपनी कम्पनी में ही इन्जीनियर है मुरलिका, इसलिये वह कई बार मुरलिका से मिल भी चुका था लेकिन दोनों परिवार आज पहली मिल रहे थे। कार दरवाजे पर आकर … Read more

जीत या हार – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

        मेरे पास एक पोस सोसायटी में एक अच्छा खासा फ्लैट था,मुझे इस फ्लैट में कोई दिक्कत भी नही थी।यह फ्लैट मेरे बेटे ने खरीदा था,उसने इसे खूब अच्छे से फर्निश करा रखा था।सबसे अच्छी बात यह थी इसी फ़्लैट में उसने एक खूब सुंदर मंदिर भी बनवाया था।मुझे मंदिर में बैठकर पूजा करना काफी सुकून … Read more

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