हुनर ने दिलाई पहचान – कविता झा ‘अविका’ : Moral Stories in Hindi

रमा की शादी के पन्द्रह वर्ष हो गए थे। पति रमेश अच्छा खासा कमाते थे। वो संयुक्त परिवार में आकर खुद को भाग्यशाली समझती थी कि आज जहांँ  लोग एकल परिवार में रहते हैं वहीं वो इतने बड़े घर परिवार में रहेगी। सब मिलजुल कर रहेंगे तो हर दिन त्यौहार की तरह ही होगा।  पर … Read more

बहू अब मै भी अपने पैरों पर खड़ी हूं। – अर्चना खंडेलवाल : Moral Stories in Hindi

ये क्या!! डिब्बे में दो लड्डू रखे थे, दोनों खत्म हो गये !! अभी थोड़ी  देर पहले तो मैंने देखे थे।  मीनल ने गुस्से मे कहा…  वो रसोई से बाहर निकली तो देखा उसकी सास के कमरे की लाइट जल रही थी, वो धीरे से कमरे में पहुंची और उनके हाथ में एक लड्डू देखकर … Read more

आईना – डॉक्टर संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

कितने जिद्दी बच्चे हैं ये,तौबा!सारी गलती इनकी मां की है जिन्होंने इन्हें बिल्कुल मैनर्स नहीं सिखाए… श्वेता अपनी जेठानी की बेटियों रानी,पायल को जिद करते देख बोली। दरअसल उसके जेठ दीपेश उन बच्चियों को बिस्किट देते ,वो नहीं खाती,चॉकलेट देते ,उसे मना कर देती,उनकी जिद थी कि मां के पास चलना है जो इस वक्त … Read more

आंखों पर चर्बी चढ़ना – डा. शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

अर्पित मल्होत्रा एक बड़े कॉर्पोरेट कंपनी का सीईओ था। उसने अपनी मेहनत और कुशलता से कंपनी को नए आयाम दिए थे। लोग उसकी सफलता की कहानियाँ सुनते नहीं थकते थे। लेकिन सफलता के साथ-साथ अर्पित में एक बदलाव आया। उसकी आँखों पर चर्बी चढ़ गई थी। वह अब दूसरों की परेशानियों को समझने या उनकी … Read more

अपमान बना वरदान – डा. शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

रवि वर्मा का नाम आज शहर के कोने-कोने में गूंजता है। लेकिन उसके सफल होने की कहानी साधारण नहीं है। यह संघर्ष, अपमान, और खुद को साबित करने की यात्रा है, जो यह सिखाती है कि असफलता और अपमान को भी एक वरदान में बदला जा सकता है। रवि एक मिडिल-क्लास परिवार में पला-बढ़ा था। … Read more

बदलाव – डाॅ उर्मिला सिन्हा : Moral Stories in Hindi

धीरे-धीरे लीना के रंग-ढंग  मैं बदलाव आने लगा है…इस बात को मौसी समझने लगी थी। ” लीना जरा मेरे पैरों में मालिश कर दो… गठिया का् दर्द बढ़ गया है… ठंड में तकलीफ़ बढ़ ही जाती है…बेटी “। ” मेरे पास समय नहीं है… अभी आफिस का काम निपटाना है “।      लीना ने दोनों कंधे … Read more

अपमान बना वरदान: धरा की कहानी – पूजा गर्ग : Moral Stories in Hindi

हवेली रोशनी से जगमगा रही थी। पेड़-पौधों पर जुगनुओं की तरह टिमटिमाती झालरों ने मानो सपनों की दुनिया बसा दी थी। संगीतमय फव्वारे, शाही व्यंजनों की महक, ढोलक की थाप, और लोकगीतों पर थिरकती स्त्रियों की खिलखिलाहट ने माहौल को और भी भव्य बना दिया। बीचों-बीच फूलों से सजा चांदी का झूला रखा था, जिस … Read more

न भी न ! मैं ‘मैं’ ही ठीक हूं ! – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

  ‘अमिता, मेरी नीली कमीज प्रेस नहीं की? कल सुबह तुम्हें बोलकर घर से निकला था। आज मेरी प्रेजेन्टेशन है।मुझे वही कमीज पहननी थी।पता नहीं तुम्हारा ध्यान कहाँ रहता है?’    ओह सॉरी,भुवन! दरअसल कल कपड़े प्रेस करने के लिए समय ही नहीं मिल पाया। मैं अभी प्रेस कर देती हूँ।    ‘समय नहीं मिल पाया ?? बाई- … Read more

बेटी के मोह में पढ़ कर सही गलत का फर्क करना भूल गई थी। – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

कल शाम से चुलबुली नंदिता ने घर  को अधर कर रखा था। भाग भाग कर काम कर रही थी ।उसकी ननद शेली अपने पति  और बच्चो के साथ नंदिता की शादी के बाद पहली बार आ रही थी। हालाकि शादी को साल भर हो गया था पर लोकेडाउन की वजह से किसी का आना जाना … Read more

पंचायत – परमा दत्त झा : Moral Stories in Hindi

आज रमेश झा और गीता देवी के ऊपर पंचायत बैठी थी। क्यों मैंने क्या किया है –रमेश जी बोले। पापी ,बहू का दूध तक पी लिया,जबकि मैथिल ब्राह्मण में भावहु की परछाई तक से–पंच रघुवीर बोले। अरे मैं बीमार था, मुझे कुछ पता नहीं -वह बोले । इधर बहू भी चिल्लाते बोली-बुलाओ जो बुलानी है। … Read more

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