ढलती शाम – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi
“पापा••• अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता “मैं••• सब कुछ छोड़-छाड़— मुन्ना को ले घर आ रही हूं••• ! पर ये समय अंश पर गुस्सा करने का नहीं बल्कि हिम्मत से काम लेने का है••मेरी बच्ची•• ! जैसा तुम बता रही हो उस हिसाब से मुझे लगता है कि अंश की मानसिक स्थिति ठीक नहीं••! पर … Read more