पर घर अलग होना ज़रूरी है – सीमा श्रीवास्तव
“मम्मी, ये भी कोई बात हुई? हर बार विवेक की तरफ़ से हम ही खड़े हों, तो वो कब जिम्मेदार बनेगा?” सान्या ने रसोई के दरवाज़े पर खड़ी-खड़ी आवाज़ थोड़ी धीमी, लेकिन साफ़ रखी। शांता देवी ने बर्तन में दाल चलाते हुए माथे पर पल्लू टिकाया,“अरे बहू, तू हर वक्त हिसाब ही करती रहती है। … Read more